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सामाजिक न्याय की लड़ाई बनाम कैदी नंबर ३३५१

Posted On 24 Dec, 2017 में

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आज दैनिक जागरण के मुखपृष्ट पर खबर छपी “सलाखों के पीछे लालू ” नीचे सलाखों के पीछे लालू जी की तस्वीर
लालू जो राष्ट्रिय ख्याति के नेता हैं बेशक उनकी आर .जे. डी पार्टी क्षेत्रीय पार्टी के दर्जे की है, बिहार में लालू जी का १५ सालों तक शासन रहा है यहाँ तक की बिहार के मशहूर चारा घोटाला काण्ड के आरोपी घोषित किये जाने के बाद उन्होंने अपनी अनपढ़ पत्नी श्रीमती राबड़ी देवी को बिहार की जनता पर थोप दिया जिसका उनकी पार्टी में भी विरोध हुवा और पूरे देश के पढ़े लिखे नेता भी अपने को ठगा महसूस करने लगे की एक अनपढ़ महिला प्रान्त की मुख्यमंत्री कैसे बन गयी? क्या लालू जी की पार्टी में पढ़े लिखे नेताओं का टोटा था ? और यहीं से लालू जी ने आर जे डी पार्टी को अपने परिवार की पार्टी बनाने के कवायद में लग गए लालू भी हाई कमान कहलाने लगे ठीक कांग्रेस पार्टी के तर्ज पर आगे बढ़ने लगे और आज लालू जी की पार्टी में उनके दोनों बेटे तेजस्वी यादव एवं तेजप्रताप यादव प्रदेश के उप मुख्य मंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बना दिए गए बेशक आज वे पद पर नहीं रहे पर विधायक तो हैं हीं लालू जी की बेटी मीसा भर्ती सांसद(राज्य सभा ) है ही लेकिन आज पूरा परिवार बेनामी संपत्ति इकठ्ठा करने के जुर्म में जल्द हीं जेल जाने वाला है और लालू जी को फिर से सजा का एलान हो ही गया है ऐसे में उनका कहना है “सामाजिक न्याय की लड़ाई वे लड़ते रहेगे जेल में रहते हुए भी क्या जनता को इतनी समझ भी नहीं रही की अकूत संपत्ति इकठ्ठा करने और चारा घोटाला करने के जुर्म में लालू जी को जेल भेजा जा रहा है वे उनके लिए सामाजिक लड़ाई लड़ेंगे यही नहीं उनको २०१५ के चुनाव में बिहार की जनता ने कैसे चुना एक गंभीर सवाल है बिहार की जनता एक सजाय ाफ्ता मुजरिम को अपन नेता क्यों कर मानती है खाली कह देने से की लालू जी सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे ,जनता को मान लेना चाहिए क्या सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाला नेता हजारों करोड़ का बेनामी संपत्ति अर्जित करेगा और सामाजिक न्याय की बात, वह कैसे करेगा जो नेता वर्षों पहले ही घोटाले के आरोप में जेल जा चूका और अभी भी उस पर ३-४ मुकदमें चल रहे हैं क्या ? भ्र्ष्टाचार करके जनता का धन लूटकर अपने परिवार वालों के नाम बेनामी संपत्ति खरीदने का नाम ही सामाजिक न्याय लड़ाई है .इस सच्चाई को बिहार की जनता को भी समझना चाहिए लालू जी के पूरे परिवार पर सी बी आयी का छापा आये दिन पड़ता है और अकूत संपत्ति का खुलासा भी हो रहा है लालू जी के सुपुत्र तेजस्वी यादव जो बिहार के उप मुख्यमंत्री थे उन पर आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा सी बी आयी चला रही है मालूम नहीं कब वे जेल जाए और हैरानी तो तब होती है की तेजस्वी यादव भी जनता को यह नहीं बताते की उन्होंने इतना धन कहाँ से कमाया? बल्कि वे बयां देते हैं उनके परिवार को फसाया जा रहा है राजनितिक बदला लिया जा रहा है आखिर उनके परिवार के सदस्यों के पास जो करोड़ों की संपत्ति है वह कहाँ से आयी इसका खुलासा वे जनता में क्यों नहीं करते क्या केवल उनके अपने परिवार के पास अरबों की संपत्ति हो जाएगी तो प्रदेश की गरीब जनता को न्याय मिल जाएगा उनका पेट उनकी संपत्ति को देखकर भर जाएगा . आज यह प्रदेश सोचने पर मजबूर है की गरीब जनता क्या इन करोड़पति नेताओं के झूठे बयानों को सुनकर तसल्ली कर ले .लालू जी जब रेल मंत्री थे तो उन्होंने हजारों करोड़ का घोटाला किया जो अब जनता के सामने आया इतना हीं नहीं लालू जी रेलवे में नौकरी देने के एवज में गरीब किसानों की खेती की जमीन अपने नाम लिखवा ली जिसपर बड़े बड़े अपार्टमेंट खड़े किये उनको बेचकर करोडो कमाए बिहार का सबसे बड़ा मॉल लालू जी का ही बन रहा था जो आज कुर्क हो चुका है ,धन्य है बिहार की जनता की फिर भी लालू जी का भासन सुनती है और उनको अपना नेता मानती है
ऐसी ख़बरों को पढ़ने के बाद एक बात जरूर मन में उठता है की आखिर अपने देश की न्याय ब्यवस्था इतनी सुस्त क्यों है ? लालू जी के खिलाफ यह फैसला २१ सालों बाद आया है इस दौरान कितने आरोपी स्वर्ग सिधार गए कितने गवाह मारे गए इससे जनता के मन में एक अविश्वास की भावना उपजती है न्याय ब्यवस्था पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह है और यही कारन है की देश की जनता को अपराधी छवि वाले नेताओं के राज काज में जीना पड़ता है और इन्हीं भ्रष्ट नेताओं के कारन आज भी देश की बहुतायत जनता जीवन की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है खासकर जनता को न्याय मिलने में इतनी देरी होती है की अंग्रेजी की कहावत चरितार्थ होती दिखती है ” जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड ” भारत सरकार को इस महत्वपूर्ण प्रश्न का जवाब जनता को डिबेट के माध्यम से देना चाहिए लालू जी समान नेताओं का जनता को बहिष्कार करना चाहिए वरना उनकी ही गाढ़ी कमाई का पैसा लूटकर नेता एवं नेता का परिवार मौज मस्ती करेगा अरबों खरबों जमाकर अपने सात पुश्तों के लिए धन इकठ्ठा करेगा आपको राशन की जगह भाषण पिलायेगा और सामजिक न्याय दिलाने की बात भी करेगा “बेशर्मी की हद है “

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