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देश में चुनाव कैसे हो ? एक महत्वपूर्ण सुझाव “बूथलेस” चुनाव

Posted On 27 Dec, 2016 में

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दैनिक जागरण के २७ दिसंबर के अंक में पृष्ट ६ पर “चुनाव सुधारों का आधार बूथलेस ब्यवस्था ” शीर्षक से श्री एन रविशंकर जो की उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त भी रह चुके हैं उन्होंने बड़ा ही महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं . उनका कहना है ऐसे अच्छे सुझावों को मानने से राजनितिक दल भी परहेज करते हैं , लेकिन मेर मानना है की उनके द्वारा सुझाये गए नौ सुझाव एकदम सही हैं मैं जनता एवं सरकार की जानकारी के लिए फिर से उद्घृत कर देता हूँ :- .

१. देश भर में बूथलेस के तहत होनी चाहिए निर्वाचन ब्यवस्था .
२. चुनाव न लड़ने वाले दलों का पंजीकरण रद्द करने की ब्यवस्था हो
३. आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों और दलों के लिए स्टेट फंडिंग की ब्यवस्था हो .
४. उम्मीदवारों की चुनाव से पूर्व , साल दर साल और चुनाव के बाद आय को सार्वजनिक करने का प्रावधान हो .
५. मिडिया भी बेहतर उम्मीदवारों को जनता के सामने लाने में अहम् भूमिका निभाएं .
६. राजनितिक दाल तमाम सर्वहितों को त्याग लोकहित के लिए आगे आएं खुद सुधर लागू कराएं .
७ . देश भर में लोकसभा और विधान सभा चुनाव एक ही समय और एक साथ कराये जाने की ब्यवस्था लागू हो .
८ . चुनाव खर्च के आडिट को सार्वजनिक किये जाने की ब्यवस्था लागु किया जाए .
९. प्रशासनिक अधिकारियों की तर्ज पर चुने गए प्रतिनिधि भी हर साल अपनी आय को सार्वजनिक करें .
ऊपर सुझाये गए सुझावों के अलावा एक और सुझाव मैं जोड़ना चाहता हूँ , वह यह की राजनितिक दाल एवं नेता , मंत्री सभी को सुचना के अधिकार के प्रति
जवाबदेह होना चाहिए वरना जनता को कोई अधिकार ही नहीं जाता चुनाव उपरांत नेता से कुछ पूछने या उनके द्वारा किये गए वायदों को नहीं पूरा करने के
बाद उनकी सदस्यता क्यों बरक़रार रहे उनको सत्ता मावेन बने रहने का कोई हक़ नहीं रहता वरना वेतन भट्ट पूरा और जवाबदेही निल बता सन्नाटा रह जाता है . श्री एन रविशंकर जी द्वारा सुझाये गए सभी बातें वर्तमान राजनितिक परिवेश में अपरिहार्य है और सरकार एवं चुनाव आयोग को इन सुझावों को कानून की शक्ल देकर अति शीघ्र लागू करना चाहिए बेहतर होगा इसके सम्बन्ध सरकार द्वारा जल्द अध्यादेश लाया जाना चाहिए .यही लोकहित में है जनहित में
वार्ना चुनाव और सर्कार केवल नेता हिट में है .
अशोक कुमार दुबे
देहरादून

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