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बिहार में शिक्षा का गिरता स्तर जिम्मेवार कौन ?

Posted On: 14 Jun, 2016 में

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दैनिक जागरण के १३ जून के अंक में सम्पादकीय पृष्ठ पर “सुशासन का इम्तिहान ” शीर्षक से श्री सुरेन्द्र किशोर का आलेख बिहार में गिरते शिक्षा के स्तर को दर्शाता है , जिस बिहार ने देश का प्रथम राष्ट्रपति दिया दिवंगत डाक्टर राजेंद्र प्रसाद और जिनको अपने क्षात्र जीवन में “परीक्षार्थी परीक्षक से बेहतर है ” का ख़िताब मिला उस बिहार में शिक्षा का स्तर इतना गिर गया की पूरे देश में शिक्षा के स्तर के मामले में बिहार की भयंकर बेइज्जती हो रही है नितीश जी को पिछले विधान सभा चुनाव में जीत उनके सुशासन और काम के चलते मिली और मुख्य मंत्री नितीश कुमार की सरकार बनने के तुरंत बाद हीं हत्या ,अपहरण , रेप जैसी घटनाओं की शुरुआत हो गयी बिहार की जनता जानती थी जब नितीश जी लालू यादव के साथ महागठबंधन किये हैं तो जंगल राज का आगमन होना अवश्यम्भावी है .चुकी इस बार बिहार चुनाव के मैनेजर श्री प्रशांत किशोर थे फिर नितीश लालू की जीत होना तय था .इसमें संदेह नहीं की लोकतंत्र में नेता जनता द्वारा ही चुने जाते हैं पर जनता झूठे बहकावे में फंस जाती है और नतीजा सबके सामने है की अब राज्य की कितनी बदनामी हो रही है .जिस प्रदेश का गार्जियन ही अपने बच्चे को नक़ल करवाता हो वहां शिक्षा का क्या स्तर होगा, इसका नमूना पिछले साल टेलीवजन पर लोगों ने देखा की कैसे चौथी मंजिल पर सीढ़ी लगाकर चोरी की पर्ची क्षात्रों के गार्जियन लोग परीक्षार्थी को पंहुचा रहें है उसको देखने के बाद ऐसा लगा था की इस बार उस बदनामी की पुर्नावृति न हो ,एस इम्तहान में चोरी के खिलाफ शख्त कार्रवाई होगी और कमोबेश शख्ती हुयी भी उसीका परिणाम है की इस बार रिजल्ट ५० % के नीचे ही रहा क्यूंकि चोरी(नक़ल ) करने पर रोक लगी लेकिन रिजल्ट तो ख़राब हुवा ही हैरानी तो तब हुयी जब टॉपर हीं नकली निकला और क्यूंकि परीक्षा समिति के जिस अध्यक्ष पर राज्य सरकार ने भरोसा किया वही शिक्षा माफियाओं का सबसे बड़ा मददगार निकला . अब सोचने की बात यह है की शिक्षा क्षेत्र के इतने बड़े अधिकारी जो शीर्ष पर बैठा है उसने तक यह न सोंचा की ऐसा करने से प्रदेश की कितनी बदनामी होगी और हैरानी की बात है की ऐसी सोंच का ब्यक्ति शिक्षा के शीर्ष पद पर पंहुचा ही कैसे ? परिणाम स्वरूप अब बिहार के क्षात्र दूसरे राज्यों में उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लेना चाहते हैं तो उनके द्वारा प्राप्त किये गए अंकों पर भरोसा ही नहीं बनता और बहुत सारे क्षात्र उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं . वैसे तो जो भी मेधावी क्षात्र होते हैं अगर उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक ठाक होती है तो ऐसे क्षात्र सालों से १२ वीं की पढ़ाई बिहार से बाहर (खासकर दिल्ली ) जाकर ही करते हैं और ऐसा पिछले १५ – २० सालों से हो भी रहा है जैसे जैसे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी एवं अनुपस्थिति बढ़ती गयी वैसे वैसे प्रदेश के मेधावी क्षात्र बिहार से बहार जाकर शिक्षा ग्रहण करने लगे और एक समय ऐसा था जब प्रशासनिक सेवा ,पुलिस सेवा , आयकर विभाग सबों में बिहार के क्षात्र ही ज्यादा से ज्यादा चुने जाते थे पर अब तो आई ए एस की परीक्षा में दूसरे प्रदेश के क्षात्र ही टॉपर हैं . अगर इक्षा शक्ति हो तो परीक्षाओं में नक़ल पूरी तरह बंद किया जा सकता है बिहार में शिक्षा क्षेत्र में खोया गौरव वापस पाया भी जा सकता है लेकिन ऐसा तब होगा जब शिक्षा माफियाओं और शिक्षाविदों के बीच जो सांठ गाँठ है उसको समाप्त किया जाए शिक्षा माफियाओं द्वारा चलाये जा रहे स्कुल कालेजों को बंद कर उनकी मान्यता रद्द की जाये . सरकार को सभी शिक्षा माफियायों का नाम पता मालुम है पर उनको सरकार का ही समर्थन प्राप्त है आज अगर कोई ईमानदार शिक्षाविद अगर स्कुल या कालेज खोलना चाहे तो सरकारी मंजूरी उसको मिलती ही नहीं और अगर शिक्षा माफिया कालेज ,इंजीनिरिंग कालेज ,मेडिकल कालेज कुछ भी खोलना चाहे आसानी से खोल सकता है जब तक एस पर लगाम नहीं लगेगा तब तक शिक्षा के स्तर में सुधार की कल्पना ही नहीं की जा सकती अब इसको तो प्रदेश के शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा क्षेत्र के उच्च अधिकारी ही बता सकते हैं की कानून के राज्य में यह सब कैसे फल फूल रहा है ? कब इन पर लगाम लगेगा ताकि प्रदेश की बदनामी ना हो और प्रदेश के शिक्षा के स्तर में सुधार आये . आये दिन आंकड़े आते हैं विद्यालय है तो शिक्षक नहीं शिक्षक हैं तो भवन नहीं की जहाँ पढ़ाई हो और शिक्षकों के कितने ही खाली पद हैं वे भरे भी नहीं जाते भर्ती की प्रक्रिया भी दोषपूर्ण है और जब शिक्षक की बहाली में ही गड़बड़ी होगी जात पांत के आधार पर शिक्षकों का चुनाव होगा फिर मेधावी लोग क्या करेंगे प्रायवेट कोचिंग सेंटर चलाएंगे बच्चे जिनको पढ़ना है वे केवल इम्तहान देने के लिए ही किसी मान्यता प्राप्त स्कुल से फार्म भरकर इम्तेहान देंगे देखा जाये तो बिहार में शिक्षा के मामले में सरकारी मशीनरी बिलकुल फेल साबित हुयी है .अभी बिहार के मुख्य्मंत्री श्री नितीश कुमार के पास समय है अतः समय रहते शिक्षा के इस गिरते स्तर में त्वरित सुधार लाने के लिए कारगर कदम उठायें तभी उनको कानून की सरकार वाला मुख्य्मंत्री कहा जा सकता है और राज्य को बदनाम होने से भी बचाया जा सकता है .
अशोक कुमार दुबे

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
June 25, 2016

आदरणीय अशोक कुमार दुबे जी, सर्वप्रथम आपको साप्ताहिक सम्मान के लिए बधाई! आपने महत्वपूर्ण विषय उठाया है, बिहार आजकल बदनाम हो रहा है, अपराधों में भी वृद्धि हो रही है. नीतीश जी कदम उठा रहे हैं, पर गोद का लड़का ही गोद को गन्दा करें तो क्या करें! उम्मीद है नितीश जी बदनामी से बहार आएंगे, नहीं तो मीडिया और अन्य पार्टियां बिहार को बदनाम करने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहते. हमलोग भी बिहार के मूल वासी हैं इसलिए तकलीफ होती है. बिहार के लोग ज्यादातर मिहनती होते हैं …पर के किया जाय कुछ तो लोग हर जगह ऐसे होते ही हैं. सादर! आपका अभिनन्दन!

Dr S Shankar Singh के द्वारा
June 25, 2016

पुनश्च :– पिछली टिप्पणी का शेष अभी तक तो सुनते थे कि कुछ पैसे खर्च करके या नक़ल करके डिग्री प्राप्त की जा सकती थी. शिक्षा माफिया सारा प्रबंध कर देता था. अब पता लगता है कि पैसे खर्च करके टॉप भी किया जा सकता है. शिक्षा के क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार चरम पराकाष्ठा पर है.

Dr S Shankar Singh के द्वारा
June 25, 2016

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार.सर्व प्रथम सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर चुने जाने पर आपको बहुत बहुत बधाई. क्षात्र नकल क्यों करते हैं क्योंकि उन्हें नौकरियाँ चाहिए. रिज़र्वेशन का लाभ पाने के लिए भी न्यूनतम निर्धारित योग्यता तो चाहिए ही. इस कारण नक़ल करके या अन्य किसी प्रकार से सर्टिफिकेट या डिग्री प्राप्त की जाती है. इसमें शिक्षा माफिया की सक्रीय भूमिका होती है. जब पैसे से डिग्री खरीदी जा सकती है पढ़ना पढ़ाना कौन चाहेगा. मैं समझता हूँ बिहार क्या सभी जगह कमोबेस यही स्थिति है. शिक्षा का स्तर गिरना तो स्वाभाविक ही है. एक अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रश्न की ऑर ध्यान आकर्षित करके आप ने महान कार्य किया है. मेरा निवेदन है की सभी ब्लॉगर इसी तरह देश की महत्वपूर्ण समस्याओं पर फोकस करेंगे. साभार

    ashokkumardubey के द्वारा
    December 3, 2016

    डॉक्टर साहब नमस्कार आपका लिखा कमेंट आज पढ़ पा रहा हूँ चुकी आप सबों ने मेरे आलेख को सराहा है मैं आपका एवं अन्य का शुक्रगुजार हूँ पर इस आलेख पर मेझे सर्वश्रेष्ठ ब्लागर का ख़िताब मिला मुझे मालूम भी नहीं हो सका मैं अपना यह आलेख अपने देहरादून प्रवास के दौरान लिखा था .आपसे निवेदन है अगर उस उसको आप उपलब्ध करा सकें तो मुझे अच्छा लगेगा . आप मेल द्वारा भी सूचित कर सकते हैं .

Shobha के द्वारा
June 22, 2016

श्री दूबे जी बिहार की शिक्षा के गिरते स्तर पर समीक्षात्मक लेख सही है मेघावी छात्र दिल्ली में भी पढने आते हैं जिससे उन्हें यहाँ का ड़ोमिसाईल मिल सके अपना जीवन सवारते हैं |

Rajesh Dubey के द्वारा
June 20, 2016

बिहार में दोनों तरह के लोग हैं, एक चोरी से पास करने वाले तथा दूसरा मेरिट वाले. चोरी से पास करने वाले सिर्फ डिग्रियां बटोर पते हैं, जबकि पढाई से आगे बढ़ने वाले देश में मिशल बनते है. अभी- अभी आई आई टी की परीक्षा में ज्यादा बच्चे बिहार से हैं. नक़ल और माफिया गिरी बंद होनी चाहिए


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