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प्रधानमंत्री जन- धन योजना का सच

Posted On: 7 Nov, 2014 Others में

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१५ अगस्त २०१४ को लाल किले से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भाषण दे रहे थे उस भाषण के दौरना उन्होंने देश की गरीब जनता की भलाई के लिए एक योजना की घोषणा की जिसका नाम है जान धन योजना . इस योजना की घोषणा के बाद अख़बारों में खबर छपी की चाँद दिनों के बाद यह खबर टेलीविजन पर सुनाई गयी की पूरे देश में ५ करोड़ से भी ज्यादा गरीबों के कहते खोले गए . जनता को मालूम नहीं की वे कहते किन गरीबों के नाम खुले और उन खतों सरकार द्वारा कितनी धन राशि गरीबों के कहते में डाली गयी . पर आज मैं उस जान धन योजना के सच को उजागर करना चाहता हूँ . वास्तव में इस देश में गरीबों के नाम पर योजनाएं तो जरूर बनायीं जातीं हैं पर उन योजनाओं से हमेशा , नेता , दलाल एवं नेताओं के चमचे हैं लाभ उठा पाते हैं , अभी पिछले दिनों टेलीविजन पर घोषणा हुयी की अब गरीब का खता किसी भी बैंक में बिना पहचान patr के खोला जा सकता है . मेरा बैंक खाता अलाहाबाद बैंक में पटना के खाजपुरा शाखा में है . थोड़े दिनों पहले मेरे मोबाइल पर इलहाबाद बैंक से एक मेसेज आया की अगर कोई मेड आपके घर में कुछ वर्षों से काम करती है तो उसका खाता आप अपने बैंक में खुलवा सकते हैं , इस बाबत मैं बैंक के मैनेजर से भी मिला उन्होंने आश्वासन दिया की वे मेरे पहचान द्वारा उस गरीब का खाता खोल देंगे , इस आश्वासन पर मैं अपनी मेड जो एक गरीब विधवा है मेरे ही घर में वह पिछले १५ सालों से काम करती है और मेरे घर में ही रहती भी है
पर अफ़सोस के साथ यह लिखना पद रहा है की जब मैं उस मेड को लेकर बैंक गया तो उसके कहते को खोलने में बैंक के कर्मचारी ने असमर्थता जताई और यह कह दिया की टेलीविजन पर जो दिखया या बताया जाता है उस आधार पर बैंक काम नहीं करता . मैं जागरण के माध्यम से अपनी आवाज प्रधानमंत्री जी तक पहुँचाना चाहता हूँ की अगर मोदी जी सचमुच गरीबों की मदद करना चाहते हैं तो उसके लिए बैंकों को भी दिशा निर्देश दें ताकि गरीब की मदद के लिए कोई आगे आये तो उसकी मदद हो सके .आशा है इलाहाबाद बैंक , खाजपुरा पटना (बिहार ) की शाखा में जरुरी निर्देश भेजा जायेगा और गरीब विधवा गोदावरी देवी का बैंक खाता खोला जा सकेगा ताकि उसको सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके . आशा है जागरण इस खबर को अपने अख़बार में जगह देगा और गरीब की भलाई का श्रेय भी लेगा . मैंने तो एक छोटा सा प्रयास किया है .

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
November 12, 2014

दुबे साहेब नमस्कार ! काफी अरसे के बाद आपका लेख पढने को मिला ! आप मेरे ब्लाक में आए सकारात्मक पुश गिराए, धन्यवाद ! दुबे जी जनता जागती नहीं जगाई जाती है ! ;यहां १० नंबर पार्क में एक दिन आरएसएस के कमल तिवारी जी ने बाजार से एक बोरा ख़रीदा और स्वम पूरे पार्क में घूम घूम कर पूरा कचरा स्वम उठाकर कचरे दानी के हवाला किया ! शायद उन्हें देखकर सफाई कर्मचारियों का विवेक जागा होगा, उसके बाद पार्क और उसके आस पास का इलाका साफ़ सुथरा नजर आने लगा है !दुबे जी किसी को तो आगे आकर जनता को झाड़ू पकड़ना सिखाना होगा ! काशी अस्सी घाट पर श्री मोदी जी करीब १० मिनट रक फावड़ा चलाया तब जाकर जनता को सफाई का मतलब समझ में आया ! शुभ कामनाओं के साथ !

    ashokkumardubey के द्वारा
    November 22, 2014

    रावत जी आपने सही फ़रमाया किसी न किसी को तो आगे आना ही होगा .जनता को खुद झाड़ू पकड़ना होगा अगर साफ सफाई चाहिए तो पर मेरा आलेख कूड़ा के प्रबंधन को लेकर था ,जो जनता के बुते की बात नहीं उसे तो नगर निगम के कर्मचारी ही उठा कर ले जायेंगे . मुझे तिवारी जी द्वारा किया गया सफाई का प्रयास भी अच्छा लगा कम से कम उनके द्वारा बोरे में कचरा उठाने से सफाई कर्मचारी भी प्रेरित हुए होंगे और रिजल्ट आपको देखने को मिला ही १० गार्डन में सफाई रहने लगी . आपने अपने विचार रखे यह पढ़कर अच्छा लगा . मैंने और दो आलेख लिखे हैं कृपया उनपर भी अपनी प्रतिक्रिया लिखेंगे धन्यवाद


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