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क्या अपने देश का सर्वोच्च न्यायलय भी राजनीती का शिकार है ?

Posted On: 23 Feb, 2014 Others में

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देश के सबसे युवा नेता और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी के हत्यारों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ११ साल पहले फांसी कि सजा सुनायी गयी थी और हाल ही में उस फांसी कि सजा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही आजीवन कारावास में बदल दिया गया सुप्रीम कोर्ट के इस एलान के बाद तमिलनाडु कि मुख्य मंत्री जयललिता ने एक बयां जारी किया कि वे तमिलनाडु कि जेल में बंद उन चारों हत्यारों को आजाद करने वाली हैं ,उनके इस एलान के फ़ौरन बाद आज के युवा कांग्रेसी उपाधयक्ष श्री राहुल गांधी जनता को अपने चुनावी भाषण में कहते सुनायी दिए की “इस देश में प्रधानमंत्री को भी न्याय नहीं मिलता” इन सब बयानों के बाद चारो तरफ प्रतिक्रिया होने लगी .जयललिता के कथन पर सभी हैरान थे लेकिन यह सब हुवा कैसे? दस सालों से तो कांग्रेस ही सत्ता में रही है और आज के राष्ट्रपती भी कांग्रेस के ही नेता रहें हैं मंत्री भी रहें हैं और इन हत्यारों कि दया याचिका उनके पास ही सुनवाई के लिए भेजी गयी थी . कानून में इन सब के लिए क्या प्रावधान है इसकी जानकारी तो आम जनता को इतनी नहीं है पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जनता में हताशा तो जरूर है कि जब प्रधानमंत्री के हत्यारे किसी राजनीतिक कारणों से बरी किये जा सकते हैं फिर गरीबों को न्याय कहाँ से मिलेगा? जिनका मुकदमा वर्षों तक जिला न्यायालयों में ही सुना नहीं जाता . वोट बैंक कि राजनीती इतनी घिनौनी हो जायेगी इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी पर आज यही सच्चाई है अपने देश के इन्साफ के मंदिर द्वारा सुनाये गए ऐसे फैसलों से जनता के बीच न्याय के प्रति क्या सन्देश जाता है? यह एक अनुत्तरित प्रश्न है और इस पर बहस कि जरूरत है न्याय मिलने में होने वाली देरी ही इसका प्रमुख कारन है ऐसा न्यायविदों का भी मानना है
देश में दो महीने के भीतर लोकसभा चुनाव होने जा रहा है सभी पार्टी के नेतागण तरह तरह के वायदे जनता से कर रहें हैं उन वायदों में इसका खुलसा भी उनको करना चाहिए कि वे अगर सत्ता में आये तो अपने देश कि दोषपूर्ण न्याय प्रणाली में कैसे सुधार करेंगे और न्याय मिलने में होनेवाली अप्रत्याशित देरी के लिए कौन से कदम उठाएंगे न्यायालयों को भी जनता के प्रति ईमानदार और निष्पक्ष कैसे बनाएंगे? आज न्यायलय निष्पक्ष फैसले देने में सक्षम नहीं दीखता है शत प्रतिशत राजनीती से प्रेरित दीखता है अपराधी आज छूट जा रहें हैं और निर्दोष जेलों में बंद हैं अपने मुक़दमे कि सुनवाई का ही इन्तेजार कर रहें और आज लाखों मुकदमें यु ही लंबित हैं, सुनवाई के लिए फैसला तो दूर कि कौड़ी है .और जब तक इस देश कि गरीब जनता को न्यायालयों से न्याय नहीं मिलेगा सही मायनो में अपन देश एक लोकतान्त्रिक देश भी नहीं कहलायेगा .अगर लोकतंत्र को ज़िंदा रखना है, तो न्याय प्रणाली में सुधार हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए तथा चुनाव के दौरान यह आवश्यक है कि पार्टियों को, नेताओं को अपने चुनावी मेनिफेस्टो में इसके लिए भी कुछ कहना चाहिए .और न्यायालयों को राजनीती से मुक्त रखने के लिए कौन से कदम उठाये जायेंगें यह भी जनता को बताना चाहिए . .

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Dubey के द्वारा
March 1, 2014

न्यायलय में न्याय पाने के लिए नहीं, किसी को तंग करने के लिए लोग जाते हैं. लम्बी परेशानी के बाद न्यायलय से न्याय पाना दुष्कर है.

deepakbijnory के द्वारा
February 28, 2014

आज देश कि स्तिथि बड़ी शोचनीय है आदरणीय अशोक जी ये मानवाधिकार केवल अपराधी के लिए ही क्यों होते हैं अपराधी के साथ ही न्याय कि बात कि जाती है उन परिवारों का क्या जिनके अपने देश की रक्षा में शहीद होते हैं और उनके हत्यारों को इस तरह CHHOD दिया जाता है न्याय कि दुहाई DEKAR अच्छा लेख अशोक जी http://deepakbijnory.jagranjunction.com/2014/02/25/वृक्षारोपण-कविता/


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