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साम्प्रदायीक सौहार्द को बनाये रखना ही देशहित और जनहित में है !

Posted On: 30 Sep, 2013 Others में

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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में आज भी शांती की बहाली नहीं हो पायी है और इसके लिए कौन जिम्मेवार है ? मेरी राय में सत्ता में आसीन लोग ही आज देश का साम्प्रदायीक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहें हैं और सामान्य स्थिति की बहाली तब तक संभव नहीं जब तक देश की धर्म निरपेक्ष कहलाने वाली पार्टियां एक समुदाय विशेस का वोट हासिल करने के लिए गलत नीतियों को देश पर थोपने का प्रयास करती रहेंगी , उन नेताओं एवं पार्टियों को सोचना होगा की देश की ८० % आबादी के साथ नाइंसाफी करके वे किसी समुदाय विशेस को कैसे ख़ुश कर सकते हैं ? इस दोहरी निति पर गंभीरता से विचार करना होगा और नीतियों को ऐसा बनाना होगा जिससे सबको साथ लेकर चला जा सके , आज प्रशासन भी अपने को लाचार पा रहा है साम्प्रदायीक सौहार्द को बनाये रखना आज मुश्कील हो रहा है जिन लोगों ने अपनों को खोया है वे बदले की ज्वाला में जल रहें हैं इसे बलपूर्वक नहीं रोका जा सकता है , इसको मिल बैठकर बात -चित के जरिये हीं किया जा सकता है और दोषियों को बचाने का प्रयास कतई नहीं किया जाना चाहिए जिन लोगों ने ऐसा घिनौना कृत्य किया है निर्दोष लोगों को मारा है उनको कानून द्वारा फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर सजा दिलवाना होगा आज फैसले में देरी ही सभी दंगों का कारन बनता हुवा दीख रहा है अतः हमारे देश की अदालतों को इसके लिए ज्यादा समय तक बैठना पड़ेगा तब जाकर लंबित मुकदमों को निपटाया जा सकेगा केवल अफसरों के तबादले कर देने से कुछ हासिल नहीं होने वाला उनको अपना काम करने देना होगा और जब सरकार का भरोसा अपने अधिकारीयों पर से ही उठ जायेगा फिर प्रशासन को चलाएगा कौन ? नेताओं और मंत्रियों को यह भी सोचना होगा . ऐसा अक्सर दिखाई देता है की सरकार और अधिकारीयों में ताल मेल में कमी है और नेता जबरदस्ती अपनी मन मर्जी उन अधिकारीयों पर लादना चाहते हैं और जब स्थिति ख़राब हो जाती है जब निर्दोष लोगों की हत्या हो जाती है तब रस्मी तौर पर अधिकारीयों के तबादले कर दिए जाते हैं, यह दलील देते हुए की फलां अधिकारी अक्षम है आज नेताओं को केवल अपने वोट बैंक का ही ख्याल है लेकिन वे भूल रहें हैं की आज जनता उतनी नासमझ और भोली नहीं रही जो उनके झूठे बहकावे में आ जायेगी कानून सबके लिए एक होना चाहिए और संविधान सम्मत कानून का पालन होना चाहिए फिर दोषी कोई भी हो उसको सजा मिलनी ही चाहिए आज अपने देश में कोई आतंकवादी भी पकडे जाने के बाद १० सालों तक जेल में बिरयानी खाता रहता है और जब इतनी देरी के बाद उसको सजा सुनायी जाती भी है तो उस पर हमारे बुद्धिमान नेता राजनीती करने लगते हैं घंटों टेलीविजन पर चर्चा चलती है तरह तरह से बयान बाजी की जाती है जिसका कोई औचित्य नहीं कानून अपना काम करे ऐसा माहौल देश में बनाना जरूरी है आज नेता लोग अपनी सुविधा के लिए सर्वोच्च न्यायलय द्वारा किये गए फैसलों को अध्यादेश लाकर बदलने का प्रयास कर रहें हैं वह भी उन अपराधियों को बचाने के लिए जिन पर गंभीर आरोप लगे हुए हैं लेकिन वे नेता सरकार में मंत्री हैं सरकार का समर्थन कर रहें हैं रस्म अदाएगी के लिए ये पार्टियाँ एवं नेता कहते फिरते हैं राजनीती का अपराधी करण ख़तम होना चाहिए और जब इसको ख़तम करने की दिशा में अदालत द्वारा फैसला आया तो यही नेता उस फैसले का विरोध करते नजर आ रहें हैं यह तो दोहरी निति हुयी और वही कहावत सच हो गयी ” हाथी के दांत वाली बात हो गयी, जो खाने के लिए और दिखाने के लिए और” जब इस पर पूरे देश में हल्ला मचा तो कांग्रेस के युवराज एवं भावी प्रधान मंत्री इस फैसले को बकवास करार दिया और इसको फाड़ कर रद्दी की टोकरी में फेकने का उपदेश दिया इस खबर को पूरे देश ने सुना अब अगर गलती से इनको ही प्रधान मंत्री बना दिया जायेगा फिर देश का क्या होगा ? जो इतना भी नहीं जानता की ऐसा फैसला उनकी ही पार्टी के प्रधान मंत्री ने किया है .
अतः राजनीती को आज देश हित और जनहित में काम करना चाहिए राजनीती लोकनीति कैसे बनें इसपर चर्चा होनी चाहिए तभी अपने देश में लोकतंत्र को बचाया जा सकेगा .और वही देश हित में होगा किसी हाल में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगड़ने देना नहीं है . और इसको हासिल करने की दिशा में प्रशासन एवं नेताओं को काम करने की जरूरत है .सुरक्षा बालों का मनोबल कैसे बना रहे इस पर विचार होना चाहिए .

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1 प्रतिक्रिया

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Dr S Shankar Singh के द्वारा
October 1, 2013

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. आपने एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय उठाया है. बहुत कम लोग ऐसे हैं जो मूलभूत समस्याओं पर ध्यान देते हैं. राजनितिक दल समाज को समुदायों में बांटकर अपने वोट बैंक बनाते हैं. समाज विभाजित होता है और देश कमजोर होता है. सभी के बीच में आपसी सौहार्द स्थापित करने का विचार किसी को नहीं आता है. यह तब सम्भव है जब सभी समुदायों/ सम्प्रदायों के लोग एक दूसरे के प्रति आदर का भाव पैदा करें. सब का सम्मान हो. किसी को हेय दृष्टी से न देखा जाय. सभी सम्प्रदायों के लोग अपने को दूसरे से श्रेष्ठ मानते हैं. यही सारे झगडे की जड़ है. हमें समझाना पड़ेगा की हम सभी की मंजिल एक है यद्यपि की पहुँचने के रास्ते अलग अलग हैं. रास्ते देश को एक सूत्र में कैसे बाँधा जाय इस पर गहन विचार करने की आवश्यकता है. आपने एक महत्वपूर्ण समस्या की और इंगित किया है. सुधी जन इस पर विचार करें और रास्ता निकालें. जागरण जंक्शन इअ पर एक डिबेट आयोजित कर अपना योगदान कर सकता है.


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