aarthik asmanta ke khilaf ek aawaj

LOKTANTR

167 Posts

520 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8115 postid : 138

क्या ? यौन उत्पीड़न के लिए उत्प्रेरक है "इज्जत की अवधारणा "

Posted On: 9 Apr, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सबसे पहले हमें इज्जत की अवधारणा क्या है? इसे जानना होगा. इज्जत का शाब्दिक अर्थ तो मेरी समझ में सम्मान और आदर को ही इज्जत कहते हैं और हमें यह जानना समझना आज के परिवेश और समाज को देखते हुए ही होगा आज इज्जत की अवधारणा समाज के किसी तबके में है बी क्या ? मैं तो कहता हूँ आज समाज नाम की कोई चीज है भी ? मैं कहता हूँ- नहीं है . अगर आज समाज वजूद में होता तो जो हो रहा है वह नहीं होता आज समाज का ताना- बाना बिलकूल बिखर सा गया है . अतः इज्जत नाम की कोई वस्तु अपने समाज में बची नहीं है और किसी की इज्जत है भी नहीं क्यूंकि आज सम्मान ख़रीदा जाता है इज्जत खरीदी जाती है इज्जत बिकती है . रही बात महिलाओं को इस इज्जत की दुहाई देकर उनको शालीनता का पाठ कौन पढ़ा रहा है? सभी जानते हैं इतिहास और हमारे पुराने ग्रन्थ भगवतगीता गवाह है की पांडवों ने द्रौपदी को जूवा के दाव पर रखा था और जुए में हार होने पर दुर्योधन ने द्रौपदी का भरी सभा में चीर हरण किया था तब तो भगवन श्री कृष्ण आये थे उनकी इज्जत को बचाने और आततायी दुर्योधन से छुड़ाने पर आज इतने दुर्योधन और रावण संसार एवं समाज में खुला घूम रहें हैं और आये दिन महिलाओं का चीर हरण और यौन उत्पीड़न कर रहें हैं और कोई कृष्ण बनकर नहीं आता, अगर समाज होता! उसमें इज्जत बचाने की धारणा होती तब न! यौन उत्पीड़न के लिए इज्जत की अवधारणा का प्रश्न उठता, आज महिलाओं के सम्मान को ठेस केवल उनके चारित्रिक पतन एवं उनका ज्यादा पैसे कमाने की ललक में अपने शरीर का नंगा प्रदर्शन करने के चलते ही हो रहा है पुरुषों ने तो हमेशा से महिलाओं को भोग की सामग्री समझा है और खासकर जब से हम एवं हमारा समाज आधुनिकता को अपनाने लगा है वरना हमारा पुराना इतिहास तो झाँसी की रानी के विषय में भी तो बताता है अब यह महिलाओं को ही देखना होगा की वे अपनी संतान को एक ऐसा इन्सान बनायें जो मां- बहनों की इज्जत कैसे करनी है? यह समझे क्यूंकि महिला तो जन्मदात्री हैऔर हर बच्चा या बच्ची के लिए पहला स्कुल उसका अपना घर है और पहली शिक्षक खुद उसकी मां है और मां जैसा अपने बच्चों को बनाना चाहती है वैसा बनाएगी बनाने वाले ऐसा कर भी रहें हैं जो माता- पिता अपने बच्चों का पूरा ध्यान रखते हैं आज उन्हीं के ऐसा करने से समाज में थोडा कुछ अच्छा दिखलाई दे रहा है अतः केवल महिलाओं के चलते परिवार की इज्जत को बट्टा नहीं लगता क्यूंकि इस समाज ने ही उनको अबला बनाया है और माना भी है.
महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचारों के लिए उनके शारीरिक रूप से कमजोर होने को ही केवल जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता इन सब बातों के लिए उनका पहनावा, उनका रहन- सहन और उनका अपने चरित्र के प्रति लापरवाह होना ज्यादा जिम्मेवार है अत्यधिक स्वछंदता आज महिलाओं के लिए खतरा दिखलाई दे रहा है अब यह बात महिलाओं को ही समझना है की वे अपनी इज्जत को बचाए रखने को कितना अहमियत देती हैं मेरी राय में महिलाएं शारीरिक रूप से बिलकुल कमजोर नहीं हैं केवल उनको अपना मनोबल ऊंचा रखने की जरुरत है .
गालियाँ देना तो बहुत ही घृणित कार्य है अब उसमें महिलाओं के नाम की गालियाँ ही ज्यादा हैं इसका कोई मतलब नहीं अब नए तरह की गालियों का इजाद तो होने से रहा जिसमें पुरुषों का नाम लेकर कोई गाली बनायीं जाये या दी जाये गाली तो गाली है वह अपने आप में एक दुषीत ब्यवहार है जिसको समाप्त करना ही ज्यादा जरुरी है और कुशिक्षा इसका असली कारन है घरों के अन्दर बोल- चाल की भाषा में भी कितने ही लोग गाली देकर ही बुलाते हैं कई रिश्ते ऐसे हैं जिसमें गाली के साथ ही बात करने का रिवाज है जो गलत है ऐसा सुनने से हीं छोटे बच्चों में ऐसी गलत आदत लग जाती है आखिर गाली का प्रयोग ही क्यूँ हो ? अतः चर्चित गालियों को ही बोल- चाल की भाषा से ख़तम करने की जरुरत है
महिलाओं के साथ यौन अपराध का उद्देश्य उससे सम्बंधित अन्य लोगों पर प्रहार करना है या नहीं ? इसे अलग सन्दर्भों में समझना होगा क्यूंकि मेरी राय में महिलाओं के प्रति यौन अपराध करने वाले ब्यक्ति का दिमाग इस तरह की बातें भी सोचता होगा? ऐसा नहीं लगता उसपर तो वासना का भूत सवार रहता है और यौन अपराध ज्यादातर मानसिक रूप से बीमार लोग ही करते नजर आते हैं इसका सही खुलासा अगर किसी ऐसे अपराध के दोषी को जब पूछ ताछ की जाती है इस बात को सार्वजनिक किया जाये, तभी चल सकता है लेकिन ऐसा संभव नहीं लगता क्यूंकि आज महिलाओं के प्रति यौन अपराध इतने तेज गति से बढ़ रहा है की ऐसा लगने लगा है की पुरुष महिलाओं का जानी दुश्मन ही बन गया है और बहुत सारे अपराध तो प्रकाश में आते भी नहीं हैं और वर्षों से घर परिवार में ही यौन उत्पीडन महिलाओं का होता ही रहता है और न ही उसकी जानकारी किसी को हो पाती है न ऐसा अपराधी समाज में प्रकाश में ही आता है आज सबसे जरुरी ऐसे अपराधों को कैसे लगाम लगाया जाये इस पर परिचर्चा करनी चाहिए कैसे महिलाओं को इसके लिए शिक्षित किया जाये इस पर चर्चा होनी चाहिए



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Dubey के द्वारा
April 11, 2013

बदलते परिवेश में मान्यताएं बदल रही हैं. समाज सिकुड़ रहा है, विचार संकुचित हो रहा है. समाज में विकृतिया आ गई है.

    ashokkumardubey के द्वारा
    April 12, 2013

    राजेश मान्यताएं भले बदलें पर मानवता को तो नहीं बदलना चाहिए आज मानवता ही बदल रही है बल्कि मैं तो कहता हूँ मानवता समाप्त हो रही है शायद अपना समाज ऐसे बदलाओं का ही आज चाहता रखता है प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

shalinikaushik के द्वारा
April 10, 2013

सही कह रहे हैं आप अपराधी पर उस वक़्त वासना का भूत स्वर रहता है और कभी कभी रंजिश का शैतान .सार्थक अभिव्यक्ति.

    ashokkumardubey के द्वारा
    April 12, 2013

    शालिनी जी प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद इस विषय पर मैं आपके विचारों की अपेक्षा रखता हूँ


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran