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सीबीआई अब स्वतन्त्र

Posted On: 14 Dec, 2012 Others में

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आज अख़बार में खबर छपी है की सर्वोच्च न्यायलय ने सी बी आई को स्वतन्त्र करार दे रही है और साथ ही माननीय मुलायम सिंह यादव के आय से अधीक मामले में जांच के आदेश दे रही है ,प्रथम दृष्टया के आलोक में इस खबर पर यकीन नहीं हो रहा है , मेरी राय में सी बी आई को सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी स्वतन्त्र एजेंसी का ही दरजा दिया हुवा है पर जैसा की देखने को मिला की कई मौकों पर सर्वोच्च न्यायालय भी शक के घेरे में दिखाई दिया और दोषी नेता अपने खिलाफ लगाये गए आरोपों को दोनों माध्यमों (सी बी आई एवं सर्वोच्च न्यायायलय ) से लम्बित रखवाने में सफल रहे , हो सकता है वर्तमान सरकार जो कांग्रेस की सरकार है इस विषय पर गंभीरता से सोंचा हो और अभी हो रहे राज्यों के चुनाव और २०१४ में होनेवाले लोकसभा के चुनाव को ध्यान में रखते हुए जनता का समर्थन पाने के लिए चुनाव जीतने के लिए ऐसी ख़बरों को अख़बारों में जगह दिलवा रही है ,लेकिन यहाँ मैं यह बताना जरुरी समझ रहा हूँ की जिस सरकार ने जनता के दुःख दर्दों को , बढ़ती जानलेवा महंगाई को , भ्रष्टाचार को ,घोटालों को , विदेश में जमा काले धन को वापस लाने को को कोई प्राथमिकता अब तक नहीं दे पायी है क्या वह सी बी आई को स्वतन्त्र रूप से काम करने देगी ?यह एक यक्छ प्रश्न है जो आज तक अनुतरित है अब तो जनता को पता चल चूका है की ना हीं सर्वोच्च न्यायालय और ना ही सी बी आई जनता के हितों का ख्याल रख पायी है और ना भविष्य में कुछ कर पाएगी बेशक चाहे सरकार कांग्रेस की बने या किसी अन्य पार्टी जैसे बी जे पी या तीसरा मोर्चा कुछ भी हो जनता की हालत में सुधार लाने के लिए किसी की जवाब देहि आज नहीं है लोगों का विश्वास कानून से और सरकार से उठता जा रहा है सरकार जनता के प्रति किसी मोर्चे पर जवाबदेह नजर नहीं आ रहें हैं जब तक इस देश में जवाबदेही तय नहीं की जाती और जवाबदेही नहीं निभाने पर ऐसे नकारे लोगों के खिलाफ सख्त क़ानूनी कार्रवाई नहीं की जाती सख्त सजा का एलान नहीं होता, फैसलों को अपने पक्छ में कर लिया जाता रहेगा रसूखवाले नेताओं और दबंग बाहुबलियों को चुनाव में हिस्सा लेने से रोका नहीं जायेगा जनता को न्याय नहीं मिलेगा और यह एक गंभीरता से चर्चा करने का विषय है नेताओं के लिए एक नया आचार सहिता चुनाव आयोग द्वारा पेश करने की जरुरत है और यह आये दिन ऐसा समाचार पढने को मिलता है की चुनाव आयोग द्वारा आचार सहिता लागु करने के बाद भी सरकार द्वारा लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा की जाती है जिससे चुनाव आयोग को लगता है यह क़ानूनी रूप से आचार सहिता का उलंघन है इसके बजाय इस विषय मेरी एक स्वतन्त्र राय यह है की चुनाव आयोग ऐसे समय में सख्ती बरतने के बजाय चुनाव के लिए नामांकन भरते वख्त प्रत्याशी की भरपूर जांच करे तो ज्यादा सही रहेगा क्यूंकि जनता को तो ऐसे समय में ही कुछ लाभ मिलता है जब चुनाव होना होता है वरना चुन के आने के बाद तो ये नेता चौड़े होकर सारे घोटाले करते रहते हैं अपने ऊपर जांच तक होने नहीं देते और इस तरह अपना ५ साल का कार्यकाल यूँ ही हंगामे करते गुजार देते है जनता मूक दर्शक बनी रहती है क्यूंकि नेता यह भी तो कहते हैं मुझे आपने (जनता ने ) चुना है मैं जन प्रतिनिधि हूँ मैं जो मर्जी आगे ५ साल तक कर सकता हूँ और ऐसा वर्तमान मनमोहन सिंह की सरकार में जनता को देखने सुनने को मिला . बयोवृध समाजसेवी श्री अन्ना हजारे जन्तर मंतर पर अनशन करते रहे धरना प्रदर्शन करते रहे लाखोंकी भीड़ जुटती रही पर क्या हुवा ? ना सरकार गिरी ना हीं उन्होंने जन्लोक्पाल बिल को पास होने दिया सरकार द्वारा किया गया वादा नहीं निभाया गया और बिपक्छी पार्टियों द्वारा दोहरी एवं दोगली निति अपनाने के चलते इतना महत्वपूर्ण कानून पारित नहीं हो पाया कौन दोषी है ?जनता , यह सरकार या वर्तमान सांसद जो हर रोज लोकतंत्र की दुहाई देते रहते हैं लेकिन हर रोज लोकतंत्र का ही गला घोटते दिखलाई देते हैं न्यायपालिका को भी अपनी जेब में रखते हैं और सी बी आई को अपने विरोधी के खिलाफ हथियार की तरह दुरुपयोग करते हैं इस विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में जिस विनोद राय को उनके काम करने की शैली के चलते विदेशों में सम्मान मिल रहा है यहाँ की सरकार उनपर तोहमत लगाने से भी नहीं चूक रही है मेरा मतलब कैग अधिकारी राय जी से है यह सब क्या है ? क्या यही सच्चे लोकतंत्र की परिभासा है आज लोकतंत्र को अधिनायकतंत्र(तानाशाही ) की तरह ये नेता लोग चला रहे हैं पूरी मनमानी कर रहें जनता का धन लूट रहें हैं इस परजल्द से जल्द विराम लगाना निहायत जरुरी है अगर सचमुच सी बी आई स्वतन्त्र एजेंसी के रूप में काम करने लगेगी सरकार के दबाव में नहीं झुकेगी डरेगी तभी जनता को न्याय मिलेगा और दोषियों को सजा होगी जनता को न्याय मिलेगाऔर आम जनता के जीवन में खुशहाली आयेगी

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
December 17, 2012

आदरणीय दुवे जी, सादर नमस्कार ! सी. बी.आई. के विषय में आपका विश्लेषण व् चिन्तन बहुत ही सही है,इसके लिए दोषी कौन ?यह कहना कठिन है ! भ्रष्टाचार से लोग कितना दुखी हैं , ये इस बात से ही समझ आ जाता है की विनोद राय भी अगर सरकार की खिलाफत करते हैं तो लोग इन्हें सच और सरकार को गलत मानते हैं ! इसका मतलब सरकार अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो चुकी है !

Rajesh Dubey के द्वारा
December 17, 2012

सीबीआई को सरकार हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है. इस हथियार पर सरकार का ही नियंत्रण रहेगा.

Sushma Gupta के द्वारा
December 15, 2012

आदरणीय दुवे जी, सी. बी.आई. के विषय में आपका विश्लेषण व् चिन्तन बहुत ही सही है,इसके लिए दोषी कौन ?यह कहना कठिन है ,परन्तु अब सी.बी.आई. को सरकार के दवाव में कार्य नहीं करना चाहिये …साभार.. मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है…

Dr S Shankar Singh के द्वारा
December 15, 2012

आपकी बातें तो ठीक हैं. लेकिन ऐसा होना कि ‘ आम जनता के जीवन में खुशहाली आयेगी ‘ मुमकिन नहीं लगता है. सी बी आई सरकार के बड़े काम की चीज़ है. जनता का विश्वास लोकतंत्र, पुलिस, प्रशासन, न्यायपालिका में समाप्त हो रहा है. आमूल चूल व्यवस्था परिवर्तन अति आवश्यक है.

nishamittal के द्वारा
December 14, 2012

सैद्धांतिक रूप से स्वतंत्र और व्यवहारिक रूप से सरकारी एजेंसी है सी बी आई

    jlsingh के द्वारा
    December 16, 2012

    निशा महोदया के विचारों से सहमत!

    ashokkumardubey के द्वारा
    December 16, 2012

    निशाजी ,ऐसी स्वतंत्रता किस काम की जब ब्याव्हारिक रूप में सरकार की एजेंसी के रूप में ही सी बी आयी काम करती रहेगी


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