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कांग्रेस द्वारा राहुल गाँधी को देश का अगला प्रधानमंत्री थोपने की तैयारी

Posted On: 15 Sep, 2012 Others में

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देशवासियों , सावधान! अब तक तो आप अंडर- अचीवर और एक कमजोर प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह को झेल रहे थे , अब आप गाँधी परिवार के युवा राजकुमार श्री राहुल गाँधी को झेलने के लिए तैयार हो जाईये . बहुत जल्द पहले वे ग्रामीण विकास मंत्री बनाये जायेंगे और अगला चुनाव आने तक उनको पी एम् पद के लिए यह कांग्रेस तैयार कर लेगी भले वे नेता कहलाने के कोई गुण रखते हों या नहीं, इस देश को तो उनको भी झेलना हीं होगा अगर कांग्रेस अगली सरकार बनाने के लिए अगुवा बनी तो, जो की संभव तो नहीं लगता पर असंभव भी नहीं क्यूंकि जब अपने देश में राजनीती धनबल द्वारा हीं चलता है चुनाव में विजय उसीकी होती है जिस पार्टी के पास पैसा ज्यादा है फिर क्या दिक्कत है? और अगर दुर्भाग्यवश बहुमत नहीं आता किसी कारण से तो दुसरे दल जो की विरोधी कहलाते हैं चुनाव बाद साथ हो लेते हैं . अभी हाल में खुलासा आया था की किस पार्टी के पास कितना धन है और उसमे कांग्रेस सबसे ऊपर है और क्यूँ न हो ? जब यह देश की सबसे पुरानी पार्टी है . इन बिन्दुओं के मद्दे नजर अब राहुल भी इस देश के सबसे उपयुक्त पी एम् कांग्रेस पार्टी की नजर में हैं अब चाहे उनके बनने के बाद देश कैसे भी चले कुछ भी होता रहे उनको तो यहाँ की जनता को झेलना ही पड़ेगा इस देश में लोकतंत्र जो है . लेकिन अगर कांग्रेस सचमुच राहुलजी को पी एम् में बनाना ही चाहती है तो कम से कम उनको एक बार भारत भ्रमण पर निकलना चाहिए और बजाय राजनीती करने के पिछड़े प्रदेशों की जनता से उनकी समस्या को रूबरू होकर देखना चाहिए और उसका कैसे? जल्दी समाधान किया जाये उसके लिए कोई ठोस और कारगर कदम उठाना चाहिए.अगर वे ऐसा करते हैं तब तो वे एक नेता के रूप में जाने जा सकते हैं मेरी राय में. क्यूंकि एक नेता की परिभासा मेरे हिसाब से यही है केवल झूठे सपने और दिलासे अब तक जनता को ये नेता देते रहे हैं और जो लोग समस्यायों से जूझ रहें हैं उनकी हालत में कोई सुधार नहीं है सारे साल जीडीपी और इन्फ्लेसन की दुहाई ये अर्थशास्त्री देते रहते हैं और बैंकों के ब्याज दर घटाते- बढ़ाते रहते हैं जिस बात को इस देश के एक प्रतिशत लोग भी शायद नहीं समझते फिर भी ये अपने को बड़े अर्थशास्त्री कहते हैं . महंगाई ,भ्रष्टाचार ,काला धन ,नक्सल्वाद , आतंकवाद ,पीने का पानी ,स्वास्थ्य, सिक्छा इत्यादि जो आम आदमी के लिए सरकार द्वारा जन कल्याणकारी योजनायें बनती हैं इस नाम पर फंड तो मुहैया कराया जाता है पर सारा का सारा बंदरबांट करके हडप लिया जाता है क्या? किसी ऐसी समस्या का समाधान हमारे भावि युवा पी एम् बताएँगे या कुछ करके दिखायेंगे? देश के किसी एक जिला में ऐसा करके पहले दिखाएँ उनको नेता किसको कहते हैं पता चल जायेगा हाँ अगर वे कुछ ऐसा कर पाएंगे तब तो सचमुच जनता के नेता कहलायेंगे और इस देश की जनता चिल्लाकर कहेगी अगला प्रधानमंत्री कौन हो ? तो यह नारा पूरे देश में गूंजेगा राहुल गाँधी हो और जब ऐसा नारा गूंजेगा तब जरुर वे एक सफल प्रधानमंत्री के रूप में उभरेंगे और आज अपने देश के राजनितिक गलियारों में राहुल की छबि को लेकर उनकी छीछालेदर हो रही है वह भी नहीं होगी . काश इस ब्लाग को राहुलजी तहत कांग्रेस के और अनुभवी नेता जो राहुल गाँधी के मार्गदर्शन का काम कर रहें हैं वे भी पढ़ते तो मुझे उम्मीद है, वे भी इस प्रस्ताव से सहमत होते और अपने युवा राहुल गाँधी को काबिल नेता कहलाने का गौरव हासिल करने का अवसर देते केवल गाँधी परिवार के होने मात्र से ही उनको यह विशाल भारत देश अपना भावी नेता एवं प्रधानमंत्री मान लेगा ऐसा कैसे कांग्रेस सोंच रही है? उनकी तो मत मारी गयी है या उनकी पार्टी में ही कोई षड्यंत्र कर रहा है, यह प्रश्न? अब तक अनुतरित है ..

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
September 18, 2012

देर सवेर ये होना ही था ! किन्तु मुझे या समझ नहीं आता की क्यूँ हम एक स्वस्थ प्रजातंत्र को एक घटिया और लालची किस्म के लोगों के हाथों में सौंपकर इसे राज तंत्र में तब्दील कर देना चाहते हैं ! एक तरफ हम लोकतंत्र को बचाने की बात करते हैं (जब अन्ना के लोग आन्दोलन करते हैं या कुछ शब्द निकलते हैं सांसदों के खिलाफ ) और दूसरी तरफ हम एक अयोग्य व्यक्ति को इस मुल्क का प्रधानमन्त्री बना देना चाहते हैं ! कोई संशय नहीं अगर राहुल प्रधानमन्त्री बन भी जायें क्योंकि मुलायम और मायावती जैसे लोग सी .बी .आई . के दर से राहुल को समर्थन देने के लिए तैयार बैठे हैं ! लालू तो सोनिया के पैरों में ही गिरा पड़ा है ! जोड़ तोड़ करके , क्योंकि सबको पैसे कमाने , पैसे बनाने और सी . बी. आई का दर बैठा है , इसलिए जोड़ तोड़ करके संभवतः राहुल प्रधानमंत्री बन जायेगा और ये एक कला दिन होगा इस लोकतंत्र के लिए !

    ashokkumardubey के द्वारा
    September 18, 2012

    योगी सारस्वत जी क्या! आपको भी नहीं लगता इस देश में सब कुछ संभव है? एक पुरानी कहावत है “जब अल्ला मेहरबान तो गधा पहेलवान ” यहाँ गधे की जगह – मायावती ,मुलायम ,लालू आदि यही सब लोग, आज अपने को चुने हुए सांसद माने बैठे हैं क्यूंकि जातिवाद की राजनीती करके ये लोग सत्ता के गलियारों में घूम रहें हैं इनको इस देश के किसी दलित ,किसी गरीब से कोई मतलब नहीं कोई सरोकार नहीं और आज का प्रजातंत्र एक राजतन्त्र के रूप में राज करता नजर आ रहा है आश्चर्य है इसे कौन? प्रजातंत्र कहता है जहाँ कैग जैसी संवैधानिक संस्था भी राजनेताओं की सुविधा अनुसार चलने को मजबूर किया जा रहा है ये नेता संविधान की दुहाई दिन रत देते रहते हैं और सारे काम असंवैधानिक तरीके से किये जा रहें हैं और दुर्भाग्य इस देश का आज कोई मजबूत बिपक्छ भी नहीं आखिर जनता अपनी गुहार लगाये तो किससे ? एक अन्ना हजारे जैसे जुझारू समाजसेवी आगे आकर भ्रष्टाचार रुपी दानव के खिलाफ खड़े हुए भी उनको जन समर्थन भी मिला लोग बड़ी संख्या में जुड़े भी पर ये राजनीतिबाज उनकी टीम को भी कई खेमे में बाटने में कामयाब हो गए अब तो कुछ बदलाव होगा ऐसा प्रतीत नहीं होता .आपके विचार रखने का धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
September 17, 2012

सर्वथा अनुचित है परन्तु आँखें तो खुलनी चाहियें जनता की .जो सबकुछ जानते हुए भी विचार नहीं करती.

    ashokkumardubey के द्वारा
    September 17, 2012

    निशाजी , आपकी संछिप्त टिप्पणी के लिए धन्यवाद


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