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प्रधानमंत्री ने की ग्रामीणों के स्वास्थ्य की चिंता

Posted On: 1 Mar, 2012 Others में

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एक तरफ तो पीएम कह रहें हैं बारहवीं पंचवर्षीय योजना में ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए बजट में १.४% से बढाकर २.५% किया जायेगा दूसरी तरफ यह भी कह रहें हैं स्वास्थ्य मूल रूप से राज्य का विषय है , लगता है और योजनाओं की तरह यह भी राज्य और केंद्र के झगडे में तब्दील होकर रह जायेगा और पीएम की यह घोषणा भी मात्र चुनावी घोषणा बनकर हीं रह जाएगी क्यूंकि जब से यूपी में चुनाव शुरू हुवा है रोज नयी नयी घोषणायें सरकार कर रही है जो की अपने आप में चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हीं कहलायेगा अगर सरकार के मन में जरा भी जनता के प्रति दायित्व का अनुभव होता तो अन्ना हजारे जैसे वृद्ध ब्यक्ति को धरना प्रदर्शन नहीं करना पड़ता जब से कांग्रेस सरकार सत्ता में आई है कमर तोड़ महंगाई हुयी है और पेट्रोल का दाम तो कितने बार बढ़ा इसकी गिनती अब लोग भूल गए हैं और पेट्रोल के दाम बढने से सभी जरुरत की चीजों का दाम अपने आप बढ़ जाता है अपने देश में मुनाफा वसूली पर कोई रोक टोक नहीं जो जितना मर्जी मुनाफा कमा सकता है ऐसी बाजार ब्यवस्था हमारे देश की सरकार ने बना रखी है उसमे साधन विहीन लोग ज्यादा संकट का सामना करते हैं और ऐसे लोगों की संख्या अपने देश में ६० से ७० प्रतिशत है अतः सरकार को चाहिए की वितरण प्रणाली को ठीक करे क्यूंकि सारा खेल वितरण प्रणाली में लगे लोगों द्वारा बिगाड़ा जा रहा है और यह स्वास्थ्य सेवा में सुधार भी उसी वितरण प्रणाली की भेंट चढ़ जायेगा दवाएं जो सरकार द्वारा निर्गत होंगी वह जरुरत मंद को मिलेंगी नहीं जब तक सरकार जवाबदेही नहीं तय करेगी कोई भी सुधार का काम इस देश में लागु नहीं किया जा सकता हाँ सिटिजन चार्टर अगर सख्ती से लागु होगा तो जरुर सुधार की उम्मीद की जा सकती है स्वास्थ्य के छेत्र में अभी बहुत कुछ करना बाकी है अभी गाँव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी सभी जगह नहीं उपलब्ध है पहले उसका प्रबंध ज्यादा जरुरी है अगर स्वास्थ्य केंद्र ही नहीं होगा तो दवाएं मुफ्त में किसको दी जाएगी ?
सरकार को इसको प्राथमिकता देना चाहिए दवाओं को मुफ्त बांटने से पहले बांटने वाली जगह यानि स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने पर विचार करना ज्यादा जरुरी है .

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
July 8, 2014

अशोक जी, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केन्द्रो की प्राथमिकता का आपका सुझाव उचित व् सर्वमान्य है, जिसपर सरकार को ध्यान देना ही चाहिए..

March 14, 2014

सहमत हूँ आपसे .

nishamittal के द्वारा
February 6, 2014

कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण आपका ये लेख नहीं देख सकी इस समय तो सरकार को सबकी चिंता है परन्तु दिखावे की

    ashokkumardubey के द्वारा
    February 10, 2014

    nisha jee der se hi sahee aapne samarthan to kiya .yah aalekh maine march 2012 me likha tha. aapka dhanyavad

ashokkumardubey के द्वारा
September 14, 2013

उषा जी आपका धन्यवाद

ushataneja के द्वारा
September 13, 2013

आदरणीय अशोक कुमार दूबे जी, आपने एक बड़ा मसला बड़ी संजीदगी से उठाया है… बढ़िया लेख.

harirawat के द्वारा
August 22, 2013

दुबे जी प्रधान मंत्री जी ने अभी तक जो कुछ कहा क्या वह हुआ है ! वे जो कुछ भी कहते हैं उनके अपने शब्द नहीं होते ! वे स्वयं स्वस्थ हैं , परिवार स्वस्थ हैं मंत्री मंडल के दिग्गज स्वस्थ हैं और जायसवाल जी, मनीष तिवाडी जी, दिग्गविजय सिंह जी स्वस्थ हैं राहुल गांधी भी स्वस्थ हैं फिर चिंता किस बात की ! जनता को अपने और अपने परिवार की चिंता करनी चाहिए ! चलो मान लिया उनहोंने वजट में राशि बढ़ाकर २.५ कर भी दी तो वह किसकी जेब में जाएगा ? बहुत सुन्दर लेख के साथ एक जलता बलता सवाल भी, बधाई ! हरेन्द्र जागते रहो ! दुबे जी “वे चले गए बिना कुछ कहे” यह एक सैनिक की पत्नी की आवाज है इसे जरूर पढ़िए ! जल्दी ही आ रहा हूँ !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
July 15, 2013

सटीक और सार्थक प्रस्तुति ! बधाई !1

mayankkumar के द्वारा
May 7, 2013

वाकई चिंतनीय विषय उठाय है आपने, पीऐम साहब तो फिर पीऐम साहब हैं, उनकी चुप्‍पी ही शायद जटिल मामलों को जड से खत्‍म करेगी । हा हा हा । शुक्रिया । हमारे ब्‍लॉग पर भी पधारें । सधन्‍यवाद ।

mayankkumar के द्वारा
March 22, 2013

आपको विचार सटीक, व सार्थक लगा, आशा करता हूं, आप हमारे ब्‍लॉग पर भी पधारेंगे , सधनयवाद

Sushma Gupta के द्वारा
March 9, 2013

आदरणीय अशोक जी, आपका चिंतन सही दिशा की ओर है ,जिससे एक बात निकल कर आती है कि गावों में सर्वप्रथम तत्काल ही स्वास्थ केन्द्रों का खोला जाना सरकार कि प्राथमिकता होना चाहिए ,तभी ग्रामीणों को सरकार द्वारा मुफ्त दी जाने बाली दवाओं का लाभ मिल सकेगा .इस सार्थक आलेख के लिए आपका अति आभार..

    Sushma Gupta के द्वारा
    March 9, 2013

    त्रुटिवश प्रतिक्रिया की पुनरावृत्ति हो है ,कृपया अन्यथा न समझें .

Sushma Gupta के द्वारा
December 16, 2012

आदरणीय दूबेजी,आपका चिन्तन -मनन बिलकुल सही है, मुफ्त दवाएं वितरित करने के पूर्व गावों में स्वास्थ्य -केन्द्रों की अति आवश्यकता है जिनमें प्रधान मंत्री जी को तत्काल प्रभाव से कार्यवाई करनी होगी…एक विचारनीय आलेख हेतु बहुत आभार…

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
August 23, 2012

अशोक जी नमस्कार ,प्रधानमंत्री सिर्फ चिंता ही कर सकते हैं,बाकि कुछ करने के लायक भी नहीं हैं,लायक के पहले ना लगाना होगा ,,,,,,,,

rahulpriyadarshi के द्वारा
March 22, 2012

प्रधानमंत्री सिर्फ चिंता ही कर सकते हैं,बाकि कुछ करने के लायक भी नहीं हैं,आपने तात्कालिक परिस्थितियों का सुन्दर आकलन किया है,खेद है जो इतनी देर से मेरी नजर पड़ी.

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 1, 2012

अशोक जी नमस्कार…. मेरे ख्याल से आवंटित धन की बंदरबांट भी रोकना अवश्यक है. धन्यवाद्……

yogi sarswat के द्वारा
March 1, 2012

आपके सवाल और उनका निदान काबिले तारीफ़ है , दुबे जी ! राज्यों के बलबूते स्वस्थ्य सेवाओं का जो हाल है वो सबको पता है ! आपने बढ़िया लेख लिखा है ! कृपया मेरे लेख पर भी अपना कीमती समय दें ! धन्यवाद ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/14

nishamittal के द्वारा
March 1, 2012

आपका विचार सर्वथा उपयुक्त है,दुबे जी.

    ashokkumardubey के द्वारा
    March 1, 2012

    आपके समर्थन का धन्यवाद अशोक कुमार दुबे


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