loktantra

samajik asmanta ke virudh loktantra

159 Posts

519 comments

ashokkumardubey


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

प्रधानमंत्री ने की ग्रामीणों के स्वास्थ्य की चिंता

Posted On: 1 Mar, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

19 Comments

बिहार में शिक्षा का गिरता स्तर जिम्मेवार कौन ?

Posted On: 14 Jun, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

5 Comments

सांसदों का वेतन

Posted On: 24 May, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

0 Comment

बी जे पी का सपना “कांग्रेस मुक्त भारत “

Posted On: 20 May, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

7 Comments

कांग्रेस अब लोकतंत्र बचाने निकली है

Posted On: 6 May, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

0 Comment

बिहार में बढ़ता अपराध जिम्मेवार कौन ?

Posted On: 10 Mar, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

0 Comment

वेतन आयोग की सिफारिशें

Posted On: 25 Nov, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

न्यायपालिका और विधायिका में मतभेद

Posted On: 23 Oct, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

नवरात्री पर्व के समापन पर एक संकल्प

Posted On: 21 Oct, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

Page 1 of 1612345»10...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार.सर्व प्रथम सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर चुने जाने पर आपको बहुत बहुत बधाई. क्षात्र नकल क्यों करते हैं क्योंकि उन्हें नौकरियाँ चाहिए. रिज़र्वेशन का लाभ पाने के लिए भी न्यूनतम निर्धारित योग्यता तो चाहिए ही. इस कारण नक़ल करके या अन्य किसी प्रकार से सर्टिफिकेट या डिग्री प्राप्त की जाती है. इसमें शिक्षा माफिया की सक्रीय भूमिका होती है. जब पैसे से डिग्री खरीदी जा सकती है पढ़ना पढ़ाना कौन चाहेगा. मैं समझता हूँ बिहार क्या सभी जगह कमोबेस यही स्थिति है. शिक्षा का स्तर गिरना तो स्वाभाविक ही है. एक अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रश्न की ऑर ध्यान आकर्षित करके आप ने महान कार्य किया है. मेरा निवेदन है की सभी ब्लॉगर इसी तरह देश की महत्वपूर्ण समस्याओं पर फोकस करेंगे. साभार

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

मैं मोदी विरोधी नहीं हु मैंने तो मोदी जी को इतना याद दिलाने की कोशिश की थी की झूठे वायदे देश की नासमझ जनता से नहीं करने चाहिए आप ही बताएं उन्होंने कौन सा अच्छा काम किया हाँ भ्र्स्टाचार जरूर काम हवा है पर आम आदमी के लिए भ्र्ष्टाचार अभी भी है हाँ बड़े बड़े उद्योगपतियों से सांठ गाँठ करके घोटाले का काम इस सरकार ने जरूर नहीं किया बाकि सबकी अपनी स्वत्नत्र राय है मैंने यही बताना चाहा है की कांग्रेस मुक्त भारत हो जाने से आम जनता का कोई लाभ नहीं आज अपने देश में ५ साल का अग्रीमेंट चल रहा है और वही हो भी रहा है, हाँ मोदी जी येन केन प्रकारेण पूरे देश में भाजपा की सरकार बन जाये इसके लिए ज्यादा काम करते दिखाई जरूर दे रहें हैं लेकिन नतीजा तो आप भी देख रहें हैं फिर भी विचार रखने के लिए धन्यवाद

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

दुबे साहेब नमस्कार ! काफी अरसे के बाद आपका लेख पढने को मिला ! आप मेरे ब्लाक में आए सकारात्मक पुश गिराए, धन्यवाद ! दुबे जी जनता जागती नहीं जगाई जाती है ! ;यहां १० नंबर पार्क में एक दिन आरएसएस के कमल तिवारी जी ने बाजार से एक बोरा ख़रीदा और स्वम पूरे पार्क में घूम घूम कर पूरा कचरा स्वम उठाकर कचरे दानी के हवाला किया ! शायद उन्हें देखकर सफाई कर्मचारियों का विवेक जागा होगा, उसके बाद पार्क और उसके आस पास का इलाका साफ़ सुथरा नजर आने लगा है !दुबे जी किसी को तो आगे आकर जनता को झाड़ू पकड़ना सिखाना होगा ! काशी अस्सी घाट पर श्री मोदी जी करीब १० मिनट रक फावड़ा चलाया तब जाकर जनता को सफाई का मतलब समझ में आया ! शुभ कामनाओं के साथ !

के द्वारा: harirawat harirawat

अच्छा काम करनेवालो को जरूर पुरस्कृत किया जाना चाहिए तभी जो लोग काम से जी चुराते हैं उनको काम करने की प्रेरणा मिलेगी . मोदी जी के सफाई अभियान से एक ही सन्देश जाता है वह देश के नागरिकों के लिए है की सभी लोग अपने आस पास की सफाई खुद करें , जो की लोग पहले से ही करते आये हैं मामला तो कूड़ा निस्तारण का है और उसको तो नगर निगम के कर्मचारी ही कर सकते हैं काश मोदी जी इन नगर निगम के कार्यकर्ताओं को भी कुछ समझाते और उनमें सफाई की प्रतियोगिता करवाते और सबसे उत्तम सफाई करने वाले निगम को को पुरस्कृत करते तब जाकर देश में सचमुच सफाई हो सकेगी और स्वक्ष भारत का सपना तभी पूरा होगा लेकिन अफ़सोस ऐसा कुछ की होता हुवा दिखाई नहीं दे रहा है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

Views being expressed here are not to criticize those workers, who are sincere in their jobs. They deserve all sorts of appreciation. Many Municipal Corporation workers want that people should do the cleaning work, even of roads, themselves. This is what is being stressed and appreciated these days by political people and media. And, this is what, that is desired by such workers. In fact, cleaning of streets and roads, at least in front of houses, has been already being done by many residents themselves under compulsion, due to work-shirking attitude of the corresponding workers. Such moves will not change the attitude of such workers. Many of the workers are not honest in their work. They expect salary and many other benefits against no or negligible work. On or just before festivals and family functions, they give their guest appearance to collect money from the homes. In case of refusal by any person, on grounds of annoyance due to their work shirking attitude, they even sometimes don't hesitate to throw garbage in front of such house . This way they successfully blackmail the general public. They are not afraid of complaints against them, probably due to their higher connections. Salaries being given to them are from taxes collected from general public. It is sometimes said by some that the cleanliness is not adequate due to their less number and can be improved by employing more persons. But, here, it needs to be stressed that improving quality of work, with same quantity of workers, is required. The workers, who honestly do their work, are also there, as excellent examples to be followed. They deserve great respect and salutes from all of us.

के द्वारा: ep23163 ep23163

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार, हमेशा क़ी भांति एक अत्यंत सुन्दर और संतुलित लेख के लिए आप बधाई के पात्र हैं. . आपकी ही तरह मेरा भी विचार है क़ि प्रधानमंत्री के पद के लिए मोदी सशक्त उम्मीदवार हैं. अगर सकारात्मक दृष्टिकोण से देख जाय तो पिछले १० वर्ष का उनका कार्य केंद्रीय और अन्य सभी राज्य सरकारों क़ि तुलना में श्रेष्ठ रहा है. मोदी नें अपने को prove किया है. गलतियां तो हरेक में निकली जा सकती हैं..मैं आपकी इस बात से भी सहमत हूँ क़ि धर्मनिरपेक्षता का नारा मुस्लिम वोट बैंक को ध्यान में रखकर लगाया जाता है. अभी तक कांग्रेस इस नारे को अमोघ अस्त्र के रूप में इस्तेमाल करती रही है. केजरीवाल नें भी पलटी मार कर इसी कांग्रेसी रास्ते को अपनाया है. कहाँ वह भ्रष्टाचार को मुख्य mudda बताकर रोज़ खुलासे करते थे अब साप्रदायिकता को खतरनाक बता रहे है. ज़ाहिर है यह रास्ता उनको आसान लगता है. कुछ लोग तो शक़ भी करने लगे हैं क़ि कहीं केजरीवाल कांग्रेस के एजेंट तो नहीं हैं. केजरीवाल ई विश्वसनीयता रसातल में पहुँच चुकी है. मोदी से कोई बेह्हतर विकल्प नज़र नहीं आता है. असली मुद्दा काशी का सरताज बनने का नहीं बल्कि देश का सरताज बनने का है.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

आदरणीय अशोक कुमार दूबे जी,आपको बहुत बहुत बधाई.आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है.आपने सही कहा है-देश कि जनता आने वाले चुनाव में कांग्रेस पार्टी को सबक सिखाएगी और कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ होकर रहेगा . और सबसे अहम् बात यह है कि बनारस बी जे पी का गढ़ रहा है वहाँ से भाजपा के उम्मीदवार यानि श्री नरेंद्र मोदी के आलावा और कौन जीत सकता है ?काशी में जो केजरीवाल जी की हास्यास्पद स्थिति है.लोग उन्हें दिल्ली का भगौड़ा और झूठ का पुलिंदा लेकर घूमने वाला नेता बता रहे हैं.ये तय दिख रहा है कि वो अपनी जमानत तो गवांएगे ही अपनी पार्टी की लुटिया भी पतित पावनी गंगा जी में डुबो देंगे.काशी में जो वो ड्रामा करके वो गए हैं,उसका आम जनता पर उनके खिलाफ ही असर पड़ा है.काशी की जनता अपने बनारसी अंदाज में उसका मजा ले रही है.जहाँ तक मोदीजी के दो जगह से लड़ने की बात है तो बहुत से नेता दो जगह से चुनाव लड़ रहे हैं.प्रधानमंत्री भारत का कहा जायेगा न की वाराणसी या वड़ोदरा का ..

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ. कुछ समय के लिए देश में गठबंधन सरकारों कि आवश्यकता है. मेरे कारन शायद आपसे अलग होंगे. एक आरं वही है जो अपने लिखा है कि एक पार्टी की सरकार होने से तानासाही का माहौल उत्पन्न होता है जैसा की इमरजेंसी में हुआ था. एक दलीय सरकार होने से कुछ ही राज्यों का विकास हो पाता है जो शासक दल को संमर्थन देते हैं. शासक दल द्वारा सभी राज्यों पर बराबर से ध्यान न दिए जाने से देश का सम्यक विकास नहीं हो पाता है. कुछ राज्य आगे निकल जाते हैं और कुछ पीछे रह जाते हैं. सभी राज्यों का सम्यक प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता है. इससे व् िसंगतियाँ पैदा होती हैं. गठंधन सरकार में सभी घटक एकदूसरे पर निगाह रखते हैं. राज्यों के साथ पक्षपात की सम्भावनाएं कम हो जाती हैं. सभी का सम्यक प्रतिनिधित्व होता है. हमने अपने यहाँ स्वयं यह देखा है की जब तक एक दलीय व्यवस्था रही कुछ राज्य बहुत पिछड़ गए. गठबंधन सरकार विभिन्न राज्यों में विभिन्न दलों की सरकारें बनने के बाद ही सभी राज्योंछज्गढ़, मध्य प्रदेश, जस्थान, उड़ीसा, झारखंड, बिहार इत्यादि का विकास शुरू हुआ. यह कहना भी गलत होगा क़ि गठबंधन सरकारें अच्छी नहीं होतीं. .मेरी समझ में वाजपेयी के नेतृतव में 23 दलों क़ि गठबंधन सरकार अब तक क़ि एक दलीय सरकारों में सबसे अच्छी सरकार थी.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

यह देश का सौभाग्य ही कहलायेगा कि अरविन्द केजरीवाल के रूप में आज एक समर्पित और ईमानदार नेता देश को मिला है और निश्चित तौर पर अब देश कि राजनीती में सुचिता आयेगी और गंदी राजनीती का सफाया होगा देश में झाड़ू फिरेगा और गंदी राजनीती को साफ़ करके परिवर्तन का दिया जलेगा .जनता का काम होगा नेता गण सादगी को अपनाएंगे और देश एवं जनता कि सेवा निस्स्वार्थ भावना से करेंगे विशेस सुविधाओं को तिलांजलि देंगे और राजनीती में परिवर्तन आएगा निश्चित ही यह आम आदमी के लिए तारणहार जैसा है और अनेक राजनेता अब आम आदमी पार्टी की नक़ल करने लगे हैं, अपनी सुरक्षा कम करने में और जनता के लिए कल्याणकारी कार्यों की घोषणा करने लगे हैं.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. जिस प्रकार का समर्थन कांग्रेस नें आप पार्टी को दिया है, उसको लेकर कुछ लोगों के दिल में शंका होना स्वाभाविक है. जागरण जंक्शन में भी इस बारे में एक ब्लॉग ब्रज किशोर सिंह का है., जिसमें उन्होंने अपनी आशंकाएं व्यक्त की हैं. कुछ लोगों का कहना ही कि केजरीवाल और 'आप ' को कंग्रेस नें मोदी का रास्ता रोकने के लिए खड़ा किया है. मुझे पूर्ण विश्वास है कि श्री केजरीवाल और 'आप ' आम आदमी को धोखा नहीं देंगे. कुछ भी हो, केजरीवाल को प्राथमिक benefit of doubt तो मिलना ही चाहिए. लोगों के विश्वास पर खरे उतरना केजरीवाल का काम है. ' आप ' के पक्ष में आपने बड़ी ही सशक्त प्रस्तुति दी है, जिसके लिए आप बधाई के पात्र हैं.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. आपका आलेख मैनें दो दिन पहले ही पढ़ लिया था और टिप्पणी लिखना चाहता था, लेकिन कंप्यूटर जी नाराज़ हो गए. दिल्ली चुनाव में मतदाता द्वारा स्पष्ट बहुमत न दिया जाने को मैं समझता हूँ कि मतदाता को किसी भी दल में पूर्ण विश्वास नहीं है. कांग्रेस में उसने अभी अभी भारी अविश्वास व्यक्त किया है. इस कारण नयी सरकार के गठन में कांग्रेस कि कोई भूमिका नहीं हो सकती. बचते हैं आप और बी जे पी. मत्तदाता का जनादेश है कि जो दल अबतक विपक्ष में थे, कांगस के अपदस्थ होने पर वे दल आपस में मिलकर एक वैकल्पिक मिली जुली सरकार बनायें. मैं जनादेश को इसी दृष्टिकोण से देखता हूँ. लेकिन केजरीवाल का यह कहना कि सरकार बनाने के लिए वे न तो किसी को समर्थन देंगे और न किसी से समर्थन लेंगे, अहंकार और घमंड की ओर इंगित करता है. सार्वजनिक जीवन में छुआछूत नहीं चलता है. यह जनादेश की अवहेलना भी माना जाएगा. एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर मिली जुली गठबंधन की सरकार बनाई जा सकती है. कई बार देखने में आया है कि गठबंधन की सरकारें एक दल की सरकार की अपेक्षा अच्छी चलती हैं. मैं समझता हूँ की अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृतव में २२ दलों की गठबंधन की सरकार अब तक की सभी सरकारों से अच्छी थी. केजरीवाल को सरकार बनाने से भागना नहीं चाहिए. धन्यवाद. आशा है अप स्वस्थ होंगे.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. आपने एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय उठाया है. बहुत कम लोग ऐसे हैं जो मूलभूत समस्याओं पर ध्यान देते हैं. राजनितिक दल समाज को समुदायों में बांटकर अपने वोट बैंक बनाते हैं. समाज विभाजित होता है और देश कमजोर होता है. सभी के बीच में आपसी सौहार्द स्थापित करने का विचार किसी को नहीं आता है. यह तब सम्भव है जब सभी समुदायों/ सम्प्रदायों के लोग एक दूसरे के प्रति आदर का भाव पैदा करें. सब का सम्मान हो. किसी को हेय दृष्टी से न देखा जाय. सभी सम्प्रदायों के लोग अपने को दूसरे से श्रेष्ठ मानते हैं. यही सारे झगडे की जड़ है. हमें समझाना पड़ेगा की हम सभी की मंजिल एक है यद्यपि की पहुँचने के रास्ते अलग अलग हैं. रास्ते देश को एक सूत्र में कैसे बाँधा जाय इस पर गहन विचार करने की आवश्यकता है. आपने एक महत्वपूर्ण समस्या की और इंगित किया है. सुधी जन इस पर विचार करें और रास्ता निकालें. जागरण जंक्शन इअ पर एक डिबेट आयोजित कर अपना योगदान कर सकता है.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

प्रिय श्री दुबे जी, मुझे आपके ब्लॉग पर तीन बातें कहनी हैं. पहली तो मुद्दों को गहराई से रेखांकित करने के लिए आप बधाई के पात्र हैं. दूसरे जैसा कि आपके लेख से प्रतिध्वनित होता है, हमें अपनी प्राथमिकताएं सुनिश्चित करनी होंगी. तीसरे जहां मेरी आपसे असहमति है आपका यह कहना कि " बड़ेप्रिय अफ़सोस की बात है कि आज देश का प्रधानमंत्री विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ,वित्त मंत्री एक बुद्धिमान एवं अनुभवी वित्त मंत्री और योजना आयोग के सलाहकार मोंटेक सिंह अहलुवालिया जो की अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री हैं ऐसे दिग्गज अर्थशात्री के होते हुए भी अपने देश की आर्थीक हालत इस तरह ख़राब होती गयी." मैं विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और योजना आयोग के सलाहकार मोंटेक सिंह अहलुवालिया को अर्थशास्त्री नहीं मानता. मेरी दृष्टी में ये लोग अनर्थशास्त्री हैं.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

के द्वारा: jlsingh jlsingh

हिन्दी आज गरीबों और अनपढ़ों की भाषा ना रहकर पढ़े लिखे विद्वानों की भाषा आज बन गई है और खासकर जबसे देश में कम्पूटर क्रांती आई है तब से हिन्दी भाषा का उत्तरोतर विकास ही हुवा है और हिन्दी और ज्यादा लोकप्रिय हुई है .हिन्दी में ब्लाग लिखने वाले ब्लागरों की संख्या भी उत्तरोतर बढ़ती जा रही है इससे भी हिन्दी के प्रचार प्रसार एवं ब्यवहार में बढ़ोतरी हुयी है और निश्चीत तौर पे आज हिन्दी बोलने समझने वालों की संख्या में वृद्धि हुयी है आज हिन्दी भषा का ब्यवहार बोल- चाल में बढ़ा है अब दक्षिण भारत के लोग भी हिन्दी बोलने में कोई संकोच नहीं करते ना ही हिन्दी का विरोध करते हैं एक समय था जब दक्षिण भारत के लोग हिन्दी का विरोध करते थे पर आज ऐसा नहीं है आज तो टेलीविजन पर भी दक्षिण भारत के लोग हिन्दी में समाचार पढ़ते दीख जायंगें हिंदी को बढ़ावा देने में केन्द्रीय विद्यालयों में हिन्दी का अनिवार्य विषय बनाकर पढाया जाना भी हिंदी को बढ़ावा देने में ज्यादा सहायक सिध्ध हुवा है और वो दिन दूर नहीं जब देश के सभी राज्यों में लोग हिन्दी में संवाद करने में गर्व महसूस करेंगे बस आज जरुरत है हिंदी को सरकारी मान्यता मिले और हिन्दी पढने लिखने वालों को बढ़ावा मिले, प्रोत्साहित किया जाये हिन्दी में जयादा से ज्यादा रोचक जानकारी किताबों द्वारा उपलब्ध कराई जाये हिंदी भाषा में पुस्तकों को बाजार और विद्यालयों में उपलब्ध कराया जाए और सरकारी काम काज में हिन्दी में कार्य करने की अनिवार्यता बनाई जाये जरुरत पड़े तो इसके लिए कोई सख्त कानून लाया जाये.. बहुत ही सुन्दर सुझाव आदरणीय दुबे जी!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. हिंदी को अमां दिलाने में आपके सुझाव व्यावारिक साबित होंगे. हमारे संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिलने पर भी इसक उपेक्षा की जाती है. थोड़े से इंग्लिश बोलने वालों नें एक षड्यंत्र के तहत इस बात की व्यवस्था कर ली है की सत्ता के सारे सूत्र इन्हीं इंग्लिश बोलने वालों के हाथ में रहें. इसमें बहुसंख्यक हिंदी और क्षेत्रीय भाषाएँ बोलने वालों की कोई भागीदारी न हो. इस सब के बावजूद हिंदी में कुछ ऐसी खूबी है की वह लगातार आगे बढ़ रही है. . सभी गैर हन्दी भासी लोग भी अब आपस में हिंदी में ही बोलना पसंद करते हैं. हिंदी में वह क्षमता है की वह विश्व की संपर्क भाषा का स्थान ले सकती है. आपके विचार सही दिशा की और संकेत करते हैं.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: nishamittal nishamittal

के द्वारा: Bhagwan Babu Bhagwan Babu

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

आदरणीय दुबे जी, सादर अभिवादन! आपने सबको आइना दिखाया है ... भाजपा केवल विरोध के दम पर सत्ता में आना चाहती जो दिवास्वप्न जैसा ही है. बलात्कार के आरोपी को मृत्युदंड मागने वाली पार्टी आशाराम को खुले आम समर्थन कर रही उन्हें बचाने का हर सम्भव प्रयास कर रही है ... भाजपा भी कांग्रेस की तरह ही है ..जनता के पास विकल्प नहीं है ...कांग्रेस के विरोध वाला सारा वोट भाजपा को जायेगा यह जरूरी नहीं है. बहुत सी क्षेत्रीय पार्टियाँ क्षेत्रीय मुद्दे पर वोट ले जायेंगी और फिर मसे मिली जुली सरकार ही बनेगी लीडरशिप चाहे जिसका हो! लगभग सभी पार्टियों के नातों का पैसा विदेश में है ऐसे समय में वे भी भारत में आ जाय तो बहुत फायदा होगा ...पर लायेगा कौन? आवाज उठाने के लिए आपका आलेख सार्थक है! अपने विचार हम सब जरूर प्रकट करें... साधुवाद!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

दुबे जी नमस्कार ! हमारी आवाज हजारों कारखानों से निकली लाखों मशीनों के कर्कश स्वरों के बीच बार बार दब जाती है ! फिर जिस देश की ऊँची कुर्सी पर आज एक बहरा, अंधा विद्वान अर्थ शास्त्री बिठा रख हो जो रिमोट से चलता हो, उससे क्या देश रक्षा हो पाएगी, जिसके रक्षा मंत्री उसकी नज़रों के आगे दुश्मन की पैरवी कर रहा हो और ये मैडम के इशारों पर मुंह खोलता और बंद करता हो, साथ ही उसे डर भी लगता है की एक बार मुंह खुल गया तो बंद नहीं होगा ! दुबे जी जब तक जनता इन भ्रष्ट रिश्वत खोर, विदेशी बैंकों में देश का धन चुरा कर जमा करता हो, जो ईमानदार देश के सच्चे और वफादार अधिकारियों को अपना वोट बैंक बनाने की राजनीति की भेंट चढ़ाता आ रहा हो उसी की झोली में वोट डालती आ रही है ! जनता को सजग करना पडेगा, ये सैनिक कौन है हमारे देश की औलाद हैं, हमारी आन बान और शान हैं, जो सरकार चाहे बिहार की नीतीश की सरकार क्यों हो (इसका कोई भी मंत्री एयर पोर्ट पर शहीदों की मृत शरीर लेने नहीं पहुंचे), चाहे यू पी की या फिर केंद्र की कांग्रेस हो, इन सबको हटाने की जरूरत है ! लेख के लिए बधाई ! हरेन्द्र जागते रहो !

के द्वारा: harirawat harirawat

बहुत ही अच्छा, प्रासंगिक और सत्य लेखन. बहुत ही अच्छे मुद्दे और प्रश्न उठाये आपने, निश्चित रूप से एक गंभीर चर्चा आवश्यक. बहुत से लोग आज यह मांग करते हैं कि सभ्य एवं ईमानदार लोगों को राजनीति में आना आवश्यक, परन्तु राजनीति में आने के लिए जितने पैसे व दंदफंद की ज़रूरत, क्या वह एक सभ्य, ईमानदार एवं सुपात्र नागरिक के पास होना संभव? कुपात्र आज संगठित हैं और उन्होंने प्रत्येक वह मार्ग अवरुद्ध कर रखा है जिनसे कि होकर एक वास्तव में योग्य व्यक्ति आगे आ सकता है. महत्वपूर्ण स्तम्भ मीडिया में भी आज कुपात्रों का ही वर्चस्व है. समाज की ऊपर की सतह में सर्वत्र पैसा, लालच और दादागिरी आज सिर चढ़कर बोल रहे हैं, आम आदमी बस किसी तरह दिन काट रहा है, वैसे ही बहुत परेशान है कुछ बोलेगा तो फिर तो परेशानियों की बाढ़ आ जाएगी, सो चुप है, ..कुछ अच्छे ढंग से जीवनयापन की चाह में जाने-अनजाने अब वह भी अधिकांशतः ऊपरी भ्रष्ट समाज का अनुगमन करने लग गया है. यथा राजा तथा प्रजा! ..वास्तव में कुछ बदलना है तो वह शक्तिशाली व सामर्थ्यवान के लिए अधिक सरल है. वह बदलेगा तो उसके अनुयायी भी बदलेंगे अवश्य, ..पर कहीं ऐसा देखा है कभी कि शिष्य के बदलने से गुरु बदल जाए? वैसे अपवाद कहीं भी कभी भी संभव हैं परन्तु यह उलट पद्धति है. ...यह निश्चित है कि ठोस एवं आमूलचूल परिवर्तनों के लिए प्रथमतः समाज की ऊपरी सतह यानी अभिजात-वर्ग में चैतन्य आना / लाना परमावश्यक है.

के द्वारा: Alarming Alarm Alarming Alarm

शालिनी जी आपका धन्यवाद आपने अपने विचार रखे हो सकता है आप कांग्रेस समर्थक हों पर कुपोषण के लिए इस देश की गरीब जनता को आपने जिम्मेदार बताया है यह मेरी समझ के परे है लगता है आपको पता नहीं यहाँ जनता किसको कहते हैं आज इस देश की ९० % आबादी जनता है और १० % आबादी शासक और अमीर वर्ग है कुछ इसमें से मध्यम वर्ग के परिवार होंगे क्या उनके हाथों में है कुछ करने को जो वे कुपोषण से अपने को बचा सकें जहाँ की जनता यह देख रही है की लाखों टन अनाज इस देश में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है पर गरीबों में बांटा नहीं जाता सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी और फिर गेहूं का आयात किया जाता है इस आर्थिक फंदे के बारे में अपने देश के काबिल प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जो एक विश्व प्रसीद्ध अर्थशास्त्री भी हैं वही जानते हैं अतः आपका यह कहना के कुपोषण के लिए जनता जिम्मेवार है सही नहीं लगता

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: shalinikaushik shalinikaushik

अडवाणी जी जैसे वरिष्ट नेता के लिए एक दिन पहले इस्तीफा देना और फिर वापस लेना उनकी वर्षों की राजनीती में जो कमाई की थी उस पर उन्होंने खुद से पानी फेर दिया है और उनकी छिछा लेदर चहुँ और हो रही है वैसे बी जे पी को अपनी पार्टी में अन्दुरुनी लोक तंत्र की बहाली जरुरी है वर्ना यह राष्ट्रिय पार्टी अंतर्कलह में ही उलझी रहेगी और आने वाले चुनाव में अपना और ज्यादा नुकसान ही करवा लेगी जो देश की जनता का भी नुकसान होगा देश की जनता आज बदलाव चाहती है कांग्रेस पार्टी की भ्रष्ट सरकार के भ्रष्टाचार से निजात पाना चाहती है पर ये नेता अपनी आपसी लडाई और राजनितिक महत्वाकांक्षा के चलते एक दुसरे से टकराव के मूड में ही दिखाई दे रहे हैं ऐसे में क्या राजनितिक भविष्य होगा कहना मुश्कील है आपने मेरे ब्लाग को सराहा इसका धन्यवाद

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

डाक्टर साहब आपने सही समझा है आज अपना देश इन सठियाये नेताओं की महत्वाकांक्षा का शिकार हो रहा है इन नेताओं को न देश की पड़ी है न पार्टी की और न जनता की बस कैसे प्रधानमंत्री की कुर्सी को पाया जाये यही सपना ये नेता रात- दिन देखते रहते हैं अतः इन नेताओं से जनता को कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए और कायदे से दोनों राष्ट्रिय पार्टियों को आने वाले लोकसभा चुनाव में जनता ने नकारना चाहिए देश तभी जाकर कोई बदलाव आएगा अब तीसरे मोर्चे की बात फिर से चल पड़ी है जो की किसी ऐसे मोर्चे बनने के कोई आसार नजर नहीं आते क्यूंकि उसमें तो दर्जनों पी एम् उम्मीदवार होंगे फिर इसका फैसला कौन करेगा ? आप ठीक कह रहें हैं जागरण के माध्यम से हम एक दुसरे से जुड़े भी रहते हैं चाहे कहीं भी रहें आपको मालूम होगा इन दिनों मैं गोवा में हूँ यहाँ मौसम बहुत अच्छा है ज्यादा से ज्यादा समय बारीश ही होती रहती है और मौसम सुहाना रहता है गर्मी का नामोनिशान नहीं है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. अडवाणी जी के बारे में आपके विचार बड़े ही संतुलित हैं. मैं अडवाणी जी को बड़ा ही सूझ बूझ वाला नेता समझता था. अभी हाल की घटनाओं नें उनकी प्रधानमन्त्री बनने की महत्वाकांक्षा की और संकेत किया है. ऐसा लगता है की अडवाणी जी के सारे क्रिया कलाप प्रधानमंत्री बनने के उद्देश्य से प्रेरित थे. महत्वाकांक्षा पालना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए सभी सिद्धांतों को तिलांजलि दे देना अडवाणी जी की छवि को खराब करता है. उन्होंने न स्वयं की छवि को खराब किया है बल्कि अपनी पार्टी का भी नुकसान किया है. हर कोई प्रधानमंत्री नहीं बन सकता. समय अपने नेता भेजता है. कांग्रेस की जर्जर हालात देखकर बी जे पी के लिए अच्छा अवसर था. लेकिन बी जे पी की अंदरूनी लड़ाई नें इस पर प्रश्न चिन्ह लगाया है. मैनें ककी बार लिखा है इ बी जे पी अपनी विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय अंदरूनी संगर्ष में लगी हुई है. Party with a difference as become party with differences. अपन ठीक लिखा है आपसी संघर्ष को छोड़ कर गरीबी, भुखमरी, गैर बराबरी, भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए. आशा है आप सकुशल होंगे. हम शुक्रगुजार हैं JJ के जिसके माध्यम से आपसे संपर्क बना रहता है. ,

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

सोंचा? अरे! इस देश में अमीर रोज और अमीर बनता जा रहा है और गरीब अति गरीब होता जा रहा है अगर सरकार की यही निति रही तो देश के सभी छेत्रों में नक्सली हमले होंगे वह दिन ज्यादा दूर नहीं अभी भी ये नेता चेत जाएँ और इस बार तो नेताओं पर हमला हुवा है शायद पहली बार नक्सलियों ने सही हमला किया है आज तक तो पुलिस वाले बेचारे मारे जाते थे लेकिन इस बार नेता मारे गए हैं अब जरुर इसके समाधान की नेता सोचेंगे , जो सरकारी नीतियां चल रही हैं वो इस समस्या को ख़त्म करने वाली नहीं , बल्कि और नाक्साली पैदा करने वाली हैं ! सरकार कितनी भी नीतियां बना ले , जब तक उन्हें मॉनिटर नहीं करेगी , सही लोगों तक नहीं पहुंचा पाएगी , तब तक ऐसी समस्याएं बनी रहेंगी ! सार्थक लेखन श्री दुबे जी

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय पाण्डेय जी, जो दीखता है वही बिकता है ये टीवी या सिनेमा का स्लोगन हो सकता है लेकिन समाज की इसमें स्वीकार्यता नहीं है या समाज निष्क्रिय नहीं होता तो जो दीखता है वही बिकता है फार्मूला नहीं चलता जबकि फिर होता जो सही होगा वही बिकेगा १९९१ जब शुरू केबल टीवी शुरू ही हुआ था तो इन सब तथ्यों को पूरी प्रमुखता के साथ कुछ हिन्दू संगठनों ने उठाया था और कहा भी था की ये सांस्कृतिक हमला है और इसके दुष्परिणाम सामने आयेंगे लेकिन तब समाज ने उनका साथ नहीं दिया और उन्हें पिछड़ा और दकियानूसी करार दिया आज की घटनाएं जो उस वक्त तथाकथित संगठनों द्वारा की गयी भविष्यवाणी की शुरुआत ही हैं अब पूरा समाज उस समय आधुनिकता की चकाचौंध मेंडूबा हुआ था तो केवल एक उस अपराधी के ही परिवार को सजा क्यों समाज को क्यों नहीं ?

के द्वारा: munish munish

धन्यवाद आपने अपने विचार रखे और मैंने अपने रही बात फ़िल्मी पोस्टर देखने की और टेलीविजन पर जो दिखाया जा रहा है उसको देखने की तो फिर वाही बात आ गयी ना जैसा मत पिता टेलीविजन पर प्रोग्राम देखेनेगे बच्चे भी देखेंगे और निस्संदेह आज का चारित्रिक अप्ताना बहुत हद तक टेलीविजन की दें है लेकिन टेलीविजन वाले तो साफ़ कहते हैं जो बिकता है वाही दीखता है मतलब टेलीविजन तो बाजार से जुदा एक ब्यवसाय है और इसमें प्रतिस्पर्धा भी बहुत है सरकारी चिनालों पर कुछ अछे प्रोग्राम भी दिखाए जाते हैं पर क्या लोग उसको देखना पसंद करते हैं नहीं न ! बस यही बात है अपने देश में तो आज अपराधी को ही सजा नहीं दी जा रही है फिर परिवार की सजा की बात ही क्या कहना है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

आदरणीय दुबे जी सादर अभिवादन यदि आपके तर्कों को माना जाए तो समाज की भी भूमिका का एक अपराधी या रेपिस्ट जैसी बीमार मानसिकता के लिए बराबर का योगदान है क्योंकि ये तो सच है की बच्चे का पहला स्कूल माँ-बाप होते हैं परन्तु समाज में हो रही घटनाओं का प्रभाव भी मनमस्तिष्क पर बराबर पड़ता है. यदि एक बच्चा रोज़ स्कूल आते जाते फिल्मों के पोस्टर देख रहा है जो खुले आम जगह जगह दीवारों पर लगे हैं तो उसका प्रभाव भी पड़ेगा यदि वो टीवी उल जलूल विज्ञापन देखेगा तो उसका प्रभाव भी पड़ेगा यदि वो फिल्मों के उत्तेज़क द्रश्य देखेगा जो आजकल हर फिल्म में होते हैं तो उसका प्रभाव भी पड़ेगा. सिर्फ सही या गलत बताने से यदि आप ये समझते हैं की बच्चे का मस्तिष्क समझ जाएगा तो आप गलत सोच रहे हैं बच्चे का मस्तिष्क बहुत जिज्ञासू होता है और जब तक पूरा माहौल नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षानुरूप न हो तब तक आप यदि ये समझें की इस तरह की घटनाएं रुक जायेंगी तो गलत है आप किसी को कितनी भी सज़ा दे दीजिये और कोई भी क़ानून बना दीजिये. इस तरह के अपराधों पर आप रोक नहीं लगा पायेंगे. इसलिए रेपिस्ट के परिवार को सज़ा देने से कुछ नहीं होने वाला

के द्वारा: munish munish

ऐसा कौनसा परिवार होगा जो कहे की मेरे लड़के को सजा दे दो इसमें रासुक्दर और किसी गरीब परिवार का सवाल ही कहा है आज जिस तेजी से बच्चियों के साथ रेप की घटनाएँ गहत रहीं है वे सरे तो गरीब परिवार की बच्चियां है देहादी मजदूरी करें वाले लोगों की बच्चियां है झुग्गी झोपडी में रहने वालों की बच्चियां है क्या कोई रसूखदार ब्यक्ति वैसी जगहों पर जाकर ऐसा करेगा मुझे नहीं लगता अतः अब समय आ गया है जब समाज को आगे आकर कानून को हाथ में लेना होगा और ऐसे अपराधियों को वहीँ मौके पर ही सरेआम सजा देना होगा बेशक पीट पीट कर मार डाला जाये ऐसे अपराधी को किसी अदालत से फैसले का इन्तेजार क्यूँ है? यह समझ के परे है यह कानून और अदालत दोनों का मजाक उड़ना ही है अपने देश का कानून दोषियों को सजा देने में बिफल रहा है यह सभी जानते हैं . रावत जी कमेंट्स लिखने का धन्यवाद

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

दुबे जी, आपके वचारों से मैं सहमत हूँ, लेकिन घटनाओं पर नजर रखते हए गरीब परिवार के बलात्कारियों के परिवारों पर तो पुलिस वाले पहले ही सिकंजा कसने लगते हैं, जब की वे पुलिस को सहयोग देते हैं, गाँव और पास पड़ोस वाले भी ऐसे परिवार वालों को परिताडित करते रहते हैं, लेकिन समस्या होती है समाज के दबंग, रसूकदार रईस, नेता, पुलिस कर्मियों के बलात्कारी संतानों से ! ऐसे दुष्कर्मी को बचाने के लिए, सबूतों को मिटाने के लिए इनका पूरा परिवार एक जुट हो जाता है ! ये लोग पुलिस जांच में भी व्यवधान पैदा करते रहते हैं अपने रसूक और पद प्रतिष्ठा का हवाला देकर जांच अधिकारी को खरीदने का प्रयास करते हैं ! ऐसे परिवार जो अपने बलात्कारी दुष्कर्मी आवारा लड़कों को बचाने का घटिया से घटिया हट कंडा अपनाते हैं उन रेपिस्ट के परिवार वालों को सजा मिलनी चाहिए !

के द्वारा: harirawat harirawat

मैं जनता हूँ मेरा यह विचार कानून के लिहाज से गलत होगा लेकिन उस कानून को कोई कुछ कहता क्यूँ नहीं? जो वर्षों तक इंसाफ देता ही नहीं जबकि कानून ही कहता है ” देरी से किया गया इंसाफ को इंसाफ नहीं कहते” ऐसा उनकी कानून की किताब में लिखा है फिर जनता को पुलिस और कानून से कैसी उम्मीद हो जहाँ किसी भी मुकदमें की कितनी मियाद होगी इसका कोई लेखा- जोखा ही नहीं अभी ४ महीने बीत गए , १६ दिसंबर की घटना को अंजाम देने वालों को कोई सजा का एलान नहीं हुवा है जिस अपराध के बाद पूरे देश की जनता जगह जगह महीने भर प्रदर्शन करती रही पुलिस को घेरती रही क्या हुवा, केवल एक अपराधी राम सिंह जेल में संदिघ्त हालत में मरा मिला चलो उसने खुद से इंसाफ को गले लगा लिया बाकियों का क्या हुवा ? सही विषय पर बेहतरीन लेखन !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

विचारों का समर्थन करने के लिए आपका धन्यवाद अब रही बात स्वेक्षा से यौन सम्बन्ध बनाने के लिए कानून बनाने की इसे तो कोरी बकवास ही कहना ठीक है आज अपने देश में कानून की कमी थोड़े है आज कानून को मानता कौन है? और कानून को जानता कौन है? सभी मन मर्जी का करते हैं कानून अपनी जेब में लिए चलते हैं हाँ यह जरुर फर्क होता है कानून कौन तोड़ रहा है, रसुखवाला ब्यक्ति या कोई साधारण अदना सा ब्यक्ति बस इतना ही फर्क है और आपने यह बात ठीक कही हमें अपने बच्चों को सही शिक्षा देनी चाहिए अगर सभी ऐसा करने लगेंगे फिर यह बढ़ते अपराध जरुर रुक जायेंगे आज अपराधों के चलते लोगों में एक अनजाना भय सा ब्याप्त है समाज दूषित होता जा रहा है और अपनापन नाम की चीज बची नहीं समाज में केवल द्वेष और जलन ब्याप्त है आज के समाज में लोग एक दुसरे को नीचा दिखाने में ही जुटे हैं और नेता इसीमे खुश हैं क्यूंकि समाज बंटा हुवा है उनकी राजनीती सफल हो रही है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

डाक्टर साहेब विचार रखने के लिए धन्यवाद ,वैसे आन्दोलनकारियों को चाहिए की बजाय सरकार से गुहार लगाने के उनको जो ओग मेरा मतलब उद्योगकर्मी कारखानों के मालिक अपना औद्योगिक कचरा यमुना गनग या और किसी नदी में छोड़ते हैं उनके खिलाफ लामबंद हों उनके कार्यालयों और कारखानों पर धरना प्रदर्शन करें प्रदुषण नियंत्रण मन्त्राय एवं अधिकारीयों का घेराव करें क्यूंकि केवल सरकार का घेराव करने से मात्र एक आश्वासन मिलेगा और होगा कुछ भी नहीं इस आन्दोलन को भी भ्रष्टाचार आन्दोलन की तरह हीं चलाना पड़ेगा और देशब्यापी बनाना पड़ेगा वर्ना यह भी राजनीति के भेंट चढ़ जायेगा और इस देश की जनता प्रदुशीत जल को पीने के लिए बाध्य हो जाएगी और वक्त ऐसा भी आएगा जब लोग पानी के लिए आपस में खून खराबा करने पर उतारू होंगे क्यूंकि घटता भूगर्भीत जलस्तर एवं नदियों का प्रदुषण हमें ऐसा करने पर मजबूर करेंगे

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. बहुत कम लोगों को इस बात का एहसास है कि हमने अपने प्रकृति प्रदत्त संसाधनों को विनाश के कगार पर पंहुचा दिया है. गंगा यमुना तथा अन्य पवित्र नदियाँ नालों का रूप ले चुकी हैं. सिल्टिंग कि वजह से नदियों की गहराई कम हो गई है. गंगा यमुना जिन्हें हम पवित्र मान कर उनकी पूजा करते थे उनमें आज पवित्र जल के बजाय सीवर का मल मूत्र , फैक्ट्रियों का डिस्चार्ज बहता है. नेता लोग जो देश को चलाने के लिए ज़िम्मेदार हैं वे अपने स्वार्थ साधन में लगे हुए हैं. प्रकृति के संरक्षण के लिए आन्दोलन स्वागत योग्य कदम है.लेकिन इस अहंकारी सरकार से कोई उम्मीद लगाना व्यर्थ होगा. बाबा रामदेव के आंदोलनों का हश्र हम देख चुके हैं. एक बात और कहना चाहूंगा कि अगर हमने जल संसाधनों पर के विनाश को जारी रहने दिया दिया तो प्रकृति अपना बदला अवश्य लेगी. एक अत्यन महत्वपूर्ण और सामयिक विषय को उठाने के लिए आप बधाई के पात्र हैं. बहुत कम लोग इस सन्दर्भ में सोचते हैं.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

जनता यह सब नहीं देखती बीजेपी और कांग्रेस को इस पर भी विचार करना होगा और कैसा बदलाव वे लायेंगे कितना लोगों से जुड़ेंगे उनकी समस्यायों का समाधान किस तरह करेंगे ऐसा कुछ देश की जनता को बताएं न की प्रधानमंत्री कौन बनेगा इस पर ही ज्यादा जोर देते रहें पहले अपने घटक दलों से राय मशविरा कर लें तभी अपने नेता की घोषणा करें तभी देशहित और जनहित में उनका पैगाम जनता के बीच पहुचेगा और तभी प्रधानमंत्री बनाने के प्रस्ताव को इस देश की जनता कबुलेगी क्यूंकि जनता बदलाव चाहती है परिवर्तन छाती है न्याय चाहती खुशहाली चाहती है ! ६५ वर्षों तक जनता को मुर्ख बना लिया अब और कितना ? बहुत सही आलेख श्री अशोक दुबे जी

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

प्रिय श्री दुबे जी सादर नमस्कार. मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ. वैसे तो बलात्कार कमो बेस इण्डिया और भारत दोनों जगह है लेकिन इंडिया में इसके लिए ज्यादा गुंजाइश है. तथाकथित इंडिया के लोग संवेदन शून्य है. अगर किसी लड़की को बदमाश छेड़ रहे हैं तो इंडिया में कोई सहायता को नहीं आता. यह भारत में सम्भव नहीं है. भारत में खुल्लम खुल्ला कोई ऐसी हिम्मत नहीं कर सकता है. इंडिया में एक उपभोक्तावादी अपसंस्कृति का प्रदुर्ब्भाव हुआ है, जिसमें अपना स्वार्थ सर्वोपरि है. इंडिया और भारत के अस्तित्व को मैं अपनी एक ब्लॉग पोस्ट में स्वीकार कर चुका हूँ. .ये मीडिया और उपभोक्तावादी कितना भी शोर मचाएं सत्य तो यह है कि बढती हुई बलात्कार की घटनाएँ पश्चिमी सभ्यता के अंधानुसरण की देन हैं. हमें वास्तविकता का सामना करना पड़ेगा. भागवत जी के बयां की सचाई से मुख नहीं मोड़ा जा सकता. आपका क्या विचार है. धन्यवाद

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

बलात्कार की घटना के पीछे बीमार मानसिकता ही जिम्मेवार है और हमारी सिक्छा पध्धति भी उतनी ही जिम्मेवार है क्यूंकि विद्यालयों द्वारा रोजगार कैसे पाया जाये यही सिखाया जा रहा है विद्यार्थियों को एक अच्छा इन्सान कैसे बनाया जाये इस ओर सिक्छा का ध्यान बिलकुल नहीं चरित्र निर्माण की तरफ कुछ ध्यान नहीं उसीके चलते आज का युवा दिशाहीन और अनुशासन हिन् हो रहे हैं कुछ हद तक लड़कियों का पहनावा भी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देता है क्यूंकि जो पहनावा आज लड़कियां अपना रहीं है वह पश्चिमी सभ्यता वाले लोग अपनाते हैं और उनके यहाँ पहनावे से लोगों की मानसिकता विकृत नहीं होती पर भारत में इंडिया में ऐसी मानसिकता युवा एवं युवतियों की नहीं है अतः केवल पहनावे को अपना लेने से वे आधुनिक नहीं बन जायेंगे विचार आधुनिक होने चाहिए सार्थक लेखन श्री दुबे जी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

हाँ मैं सेवानिविर्त जज काटजू जी के विचारों से शत प्रतिशत सहमत हूँ और वह यह की अगर यह घटना किसी छोटे से गाँव ,छोटे से कसबे या किसी अन्य राज्य में घटी होती तो इस तरह सुर्ख़ियों में नहीं आई होती और ना ही इतनी इस पर चर्चा होती . हमारी सरकार हमारे ,नेता हमारे मंत्री जरुर इस पर अपने विचार रख सकते हैं और इस जघन्य अपराध पर भी अपनी राजनितिक रोटियाँ सेंक सकते हैं क्यूंकि किसी की अस्मत लूट ली गयी इससे उनका क्या सरोकार उनकी सरकार उनकी कुर्सी तो नहीं छीनी गयी आज हमारे देश के प्रशासनीक अधिकारी , ऊँचे पुलिस अधिकारी हमारी अदालतें सब आज किसी दुखियारे ,किसी सताए गए के लिए जरा भी संवेदनशील नहीं दीखते , आखिर ऐसा क्यूँ है ? क्या हमने मानवता को तिलांजली दे दी है . मेरी समझ से सारा दोष हमारे देश की सिक्छा ब्यवस्था और युवाओं का दिशा विहीन होना बेरोजगार होना यही दोषी है आज की घटनाओं का और साथ ही स्कूलों में महाविद्यालयों में केवल रोजगार प्राप्ति कैसे हो?केवल यही सिखाया जा रहा है चरित्र निर्माण पर किसी संस्था का ध्यान नहीं . मुझे अपना समय याद आता है जब मैं विद्यार्थी था उस समय हमें हमारे सिक्छ्क जरुर किसी महापुरुष की जीवनी सुनाते थे और उनके जीवन से हमने क्या प्रेरणा लेनी है सहमत हुआ जा सकता है आपकी बातों से ! लेकिन फिर भी हमें ये भी सोचना चाहिए की दिल्ली की घटना ही से अगर कठोर कानून अमल में आता है तो इसका फायदा देश भर की महिलाओं को ही मिलेगा !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

निशाजी , धन्यवाद ! मुश्कील कोई काम नहीं अगर इच्छा शक्ति हो आज राजनेताओं में इछाशाक्ती की ही कमी दिखलाई दे रही है और केवल जोड़ तोड़ की राजनीती हावी है अवसरवादिता चरम पर है और किसी नेता को निस्स्वार्थ सेवा का ख्याल नहीं आता है आखिर राजनीती में संलग्न लोग क्यूँ इस तरह का अशोभनीय और संवेदनहीनता दिखा रहें है यह मेरी समझ से परे है जहाँ तक केजरीवाल का की पार्टी का सवाल है उनको पूरे desh men घूमना होगा और अपनी आम आदमी पार्टी के लिए कैंडिडेट की तलाश करनी होगी जो उनके मापदंडों पर खरा उतरे इसमें कोई संदेह नहीं की अपने देश में इमानदार और समर्पित लोगों की किल्लत है पर जरुरत है उनकी पहचान करने की उनको पुनः जागृत करने की अगर केजरीवाल ऐसा कर पाएंगे तो आज की राजनीती और ब्यवस्था दोनों में अवश्य परिवर्तन आएगा और वर्षों से शोषित हो रहे है लोगों के जीवन में भी कोई बदलाव दिखाई देगा हमें हर हाल में आशाव्नित रहन है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. एक अत्यंत ही सटीक आलेख के लिए आप बधाई के पात्र हैं. मैं समझता हूँ कि बिहार के मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार के पाकिस्तान दौरे से दोनों मुल्कों के आपसी संबंधों में निश्चित बदलाव आएगा. भारत के बाहर जब जब मैं रहा मैनें पाया कि पाकिस्तानी तुरंत अच्छे मित्र बन जाते हैं. उनके दिल में भारत के प्रति कहीं न कहीं अपनत्व की भावना है. पाकिस्तान में ऐसे लोग बहुसंख्य में हैं ओ भारत को अपना दुश्मन समझते हैं. इसमें राजनीतिज्ञ और फ़ौज के लोग शामिल हैं लेकिन थोड़े से ही सही ऐसे लोग भी हैं जो भारत के प्रति सद्भावना रखते हैं.नितीश कुमार और अंन्य प्रभावशाली लोगों की पाकिस्तानी यात्रा से उन लोगों को बल मिलेगा जो भारत के प्रति सद्भावना रखते हैं. हमें ऐसे लोगों को cultivate करना चाहिए. इसमें भारत और पाकिस्तान दोनों का भला है.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

दुबे जी,सादर नमस्कार,निश्चित रूप से न्यायपालिका ही इस देश के जनता के हितों की रक्षक है,वरना नेताओं की मनमानी का अनुमान लगाना भी कंपकंपी ला देता है,न्यायपालिका में कहीं-कहीं कमजोर कड़ियाँ भी है,किन्तु मेरा मानना है कि अगर न्यायपालिका पूर्णरुपेन इमानदार हो जाए और ठान ले तो भ्रष्टाचार की धज्जियाँ उड़ा देने में सोचने का समय भी न लगे,पुलिस भी न्यायपालिका का ही एक अंग है.लेकिन अगर एक लोकतंत्र में दीर्घकालीन सकारात्मक बदलाव चाहिए तो वो न्यायपालिका कर पाने में असमर्थ है क्यूंकि वो सिर्फ दोषियों को दण्डित कर सकती है,उचित जनप्रतिनिधियों का निर्वाचन नहीं कर सकती,जन-प्रतिनिधियों का निर्वाचन हर हाल में जनता ही करती है,अगर जनता सही फैसला ले तो लोकतंत्र में विकृति आने का सवाल ही नहीं पैदा होता,हम अगर अपनी जीभ पर नियंत्रण कर लें तो फिर विरले ही कभी इलाज की जरुरत पड़ेगी.जनता के पास अपने फैसले में सुधार करने के हर पांच साल पर मौके मिलते हैं.

के द्वारा: rahulpriyadarshi rahulpriyadarshi

आदरनीय अशोक जी, सादर अभिवादन! आपके विचार सही है, पर आप जानते हैं न्यायपालिका के आंख पर पट्टी बंधी होती है. जब तक कोई केस दर्ज नहीं होता न्यायपालिका खुद कुछ नहीं करती. केस दर्ज होने पर भी सालों साल सुनवाई होती रहती है.... नतीजा कुछ नहीं. ऐसे अनेक मामलों में आपने भी देखा होगा. सुब्रमन्यम स्वामी कब से अदालतों का चक्कर लगा रहे हैं ... नतीजा हम सबके सामने है. हजारों लाखों लंबित मुकदमे, सुस्त न्याय प्रक्रिया, न्यायालयों में भी भ्रष्टाचार .... क्या लगता है आपको ...? अगर सही समय पर न्याय हो गया रहता और उसका पालन होता तो आज यह हालत ही नहीं बनते, सैंकड़ो आरोपित संसद सदस्य नहीं बनते ... जरूरत है पूरी ब्यवस्था परिवर्तन की उसके लिए देश के हर प्रबुद्ध और इमानदार जन मानस को आगे आना होगा या फिर खूनी क्रांति.....आपकी चुनता जायज है पर हम सब मूक दर्शक भी भांति देख रहे हैं .... मीडिया कुछ करती है तो उसपर भी आरोप मढ़ दिए जाते हैं ... कहीं कहीं मीडिया भी बिक जाती है ... आपका आक्रोश सही है ... पर हम सब अपनी रोजी रोटी की चिंता में ब्यस्त हैं ... विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों असंख्य हाथों से देश को लूट रहे हैं और हम सब असहाय बने फिर रहे है....और क्या कहूं गोस्वामी जी की एक पंक्ति "समरथ को नहीं दोष गुसाईं ..... से समाप्त करता हूँ. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

न्यायपालिका निस्पक्छ है ऐसा समझा जाता रहा है हाँ कई मामलों में नेताओं मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारीयों ने कुछ फैसले अपने पक्छ में भी कराये होंगे लेकिन ऐसा कुछ मामलों में ही हुवा प्रतीत होता है पक्छ्पात तो न्यायपालिका भी करती रही है लेकिन न्यायपालिका जांच के लिए दबाव तो बना सकती है सरकार पर आज तो इस सरकार के मंत्री सीधे सीधे आरोपों को ख़ारिज कर दे रहें हैं और जांच ले लिए भी मन कर दे रहे हैं अगर इनको लगता है की उन पर लगाया गया आरोप झूठा है तो जिसने आरोप लगाया है उसके खिलाफ वे अदालत में जाने के लिए स्वतन्त्र हैं लेकिन आज ऐसा तो नहीं हो रहा है तो मेरी समझ में आज न्यायालय की भूमिका अहम् हो गयी है इस सरकार से जनता का काम करवाने के लिए और जनता के पैसे की लूट तभी रुकेगी जब इन मामलों की जांच होगी दोषियों को जेल जाना पड़ेगा रही बात इज्जत की तो जिसकी इज्जत होगी उसकी जाएगी ना आज नेताओं की कितनी इज्जत है और अपनी इज्जत के लिए वे कितने चिंतित है यह जग जाहिर है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

इस तरह से मुरख बनाने के बाद भी वे उसी कांग्रेस को चुनेगे जिसने घोटाले करने में अपना विश्व रिकार्ड बना लिया है और अपनी इस करनी का बोझ जनता पर दाल दिया है महंगाई के रूप में . नए साल के शुरुआत के साथ ही तमाम नयी योजनाओं की एक साथ शुरुआत करके आम लोगों में अपनी विकासपरक छबि को पुख्ता बनाने की यह कांग्रेसी चाल को यहाँ की जनता क्या यू अनदेखा कर देगी? ये एक तरह की विडम्बना कह लीजिये या देश का दुर्भाग्य ! जब जब चुनाव आते हैं यब हम लोग आपस में इतना बात जाते हैं की हमारे इस विघटन की वज़ह से चोर और गुंडे भी जीतने में सफल रहते हैं ! लोग घोटालों और भ्रष्टाचार को भी जल्दी भूलने लगे हैं , लेकिन फिर भी उम्मीद है की राज बदलेगा ! लेकिन राज बदल जाने से बहुत ज्यादा की उम्मीद करना बेमानी ही होगा !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

योगी सारस्वत जी क्या! आपको भी नहीं लगता इस देश में सब कुछ संभव है? एक पुरानी कहावत है "जब अल्ला मेहरबान तो गधा पहेलवान " यहाँ गधे की जगह - मायावती ,मुलायम ,लालू आदि यही सब लोग, आज अपने को चुने हुए सांसद माने बैठे हैं क्यूंकि जातिवाद की राजनीती करके ये लोग सत्ता के गलियारों में घूम रहें हैं इनको इस देश के किसी दलित ,किसी गरीब से कोई मतलब नहीं कोई सरोकार नहीं और आज का प्रजातंत्र एक राजतन्त्र के रूप में राज करता नजर आ रहा है आश्चर्य है इसे कौन? प्रजातंत्र कहता है जहाँ कैग जैसी संवैधानिक संस्था भी राजनेताओं की सुविधा अनुसार चलने को मजबूर किया जा रहा है ये नेता संविधान की दुहाई दिन रत देते रहते हैं और सारे काम असंवैधानिक तरीके से किये जा रहें हैं और दुर्भाग्य इस देश का आज कोई मजबूत बिपक्छ भी नहीं आखिर जनता अपनी गुहार लगाये तो किससे ? एक अन्ना हजारे जैसे जुझारू समाजसेवी आगे आकर भ्रष्टाचार रुपी दानव के खिलाफ खड़े हुए भी उनको जन समर्थन भी मिला लोग बड़ी संख्या में जुड़े भी पर ये राजनीतिबाज उनकी टीम को भी कई खेमे में बाटने में कामयाब हो गए अब तो कुछ बदलाव होगा ऐसा प्रतीत नहीं होता .आपके विचार रखने का धन्यवाद

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

देर सवेर ये होना ही था ! किन्तु मुझे या समझ नहीं आता की क्यूँ हम एक स्वस्थ प्रजातंत्र को एक घटिया और लालची किस्म के लोगों के हाथों में सौंपकर इसे राज तंत्र में तब्दील कर देना चाहते हैं ! एक तरफ हम लोकतंत्र को बचाने की बात करते हैं (जब अन्ना के लोग आन्दोलन करते हैं या कुछ शब्द निकलते हैं सांसदों के खिलाफ ) और दूसरी तरफ हम एक अयोग्य व्यक्ति को इस मुल्क का प्रधानमन्त्री बना देना चाहते हैं ! कोई संशय नहीं अगर राहुल प्रधानमन्त्री बन भी जायें क्योंकि मुलायम और मायावती जैसे लोग सी .बी .आई . के दर से राहुल को समर्थन देने के लिए तैयार बैठे हैं ! लालू तो सोनिया के पैरों में ही गिरा पड़ा है ! जोड़ तोड़ करके , क्योंकि सबको पैसे कमाने , पैसे बनाने और सी . बी. आई का दर बैठा है , इसलिए जोड़ तोड़ करके संभवतः राहुल प्रधानमंत्री बन जायेगा और ये एक कला दिन होगा इस लोकतंत्र के लिए !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

स्त्रियों के साथ होनेवाले ज्यादतियों के लिए अक्सर पुरुषों को ही अपराधी समझा जाना एकदम गलत है किसी घटना के होने या न होने में दोनों बराबर रूप से जिम्मेवार कहे जायेंगे क्यूंकि कोई यूँ ही किसी पर ज्यादतियां नहीं करता इसके दुसरे पहलु को देखना जरुरी है अतः आज जैसी घटनाये घट रहीं हैं उसमे हमारी इस धरना में बदलाव आना ही चाहिए और इसका फैसला अदालत ही को करना चाहिए किसी अपराध को अंजाम देने के पीछे दुसरे पक्छ की बात को सुनना चाहिए यूँ एकतरफा फैसला की पुरुष दोषी है यह गलत होगा और मैं फिर कहूँगा महिलाओं पर होनेवाले अत्याचारों में महिलाओं का आज ज्यादा हाथ है यहाँ तक की महिलाएं हीं महिलाओं की हत्या भी आज करवा रहीं हैं उसका ताज़ा सबूत अभी गीतिका के केश में उजागर हुवा है प्रतिस्पर्धा की लहर में कौन किससे कैसे आगे निकलेगा इसके लिए सारे हथकंडे आजमाए जा रहें हैं चाहे किसी की हत्या ही क्यूँ करनी पड़े? किसी को रास्ते से हटाकर खुद को आगे करने की चाहत आज ज्यादा देखने को मिल रही है अतः महिलाओं को अपने ऊपर होने वाले ज्यादतियों के लिए उन्हें अपने आपको और सशक्त और सुरक्छित बनाने के लिए कुछ मजबूत कदम उठाये जाने की जरुरत है जायदा से ज्यादा महिलाओं को कानून की पढाई पढनी चाहिए ताकि आज उनपर जो अपराध या अत्याचार हो रहें हैं उन मुजरिमों को अदालत में घसीटकर सजा दिलवा पायें मेरी राय में आज सबसे बड़ा महिलाओं के लिए कैरियर वकालत की पढाई में है इस पढाई के बल पर वे अपनी रक्छा के साथ साथ औरों को भी मदद पहुंचा पाएंगी वैसे तो आज महिलाएं अपने देश में शीर्ष पर देखी जा सकती हैं यहाँ तक के प्रतियोगी परीक्छाओं में भी वे पहले नंबर पर आ रहीं है अतः इन सबके साथ उनको अपने चरित्र निर्माण पर भी जयादा ध्यान देने की जरुरत है जो चरित्रवान होगा वह कभी अपने लिए गलत फैसले नहीं लेगा दुबे साब आपकी लिखी हुई बातें दिल तक पहुँच रही हैं ! संभव है सब लोग आपकी बात से सहमत न हों किन्तु आपने सटीक लिखा है !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

जिन बिचारों को पटवारी ने लूटा उन लाचार लोगों के वोट देने से हिन् यह लुटेरे चुन कर के सत्ता पर काबिज हो जा रहें हैं , हाँ इतना जरुर है अपने ६२ साल के लोकतंत्र में भी ये विचारे अपने वोट की कीमत को नहीं जान सके वर्ना दृश्य कुछ और होता अतः हमेशा आशावान रहना है आलोचना जितना करना है उसका हमें हक़ है पर साथ हिन् निराशा पालना गलत होगा वर्ना इन लुटेरों का मनोबल और बढेगा जरुरत है चुनाव के दौरान लोगों को जागृत करने की अतः समय आ गया है चुनाव को एक पर्व की तरह मनाया जाये और उस दिन छुटी न की जाये अपने गाँव अपने प्रदेश के लोगों को किसको वोट देकर चुनना है इसकी जानकारी दी जाये और ऐसा कार्य निश्चीत रूप से युवा हिन् कर सकता है , कमेन्ट के लिए धन्य्वाद्द मेरा प्रयास जरी रहेगा युवा वर्ग nis

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

रक्ताले जी आपने एक महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है जब अपने पी एम् साहब शहीद भगत सिंह के हटाये के नाम को मशहूर करने वास्ते सड़क का नाम रखना चाहते हैं फिर इससे पता यह चल जाता है वे वीर शहीदों की कितनी चिंता करते हैं जनी परिवारों ने अपना जवान कमाऊ बेटा देश के लिए कुर्बान किया उनके प्रति ये कैसी दुर्भावना है अफ़सोस तो यह जानकर और हुवा की सन १९४७ में अपने देश को आजादी नहीं मिली है यह केवल पावर का ट्रांसफर हुवा था ऐसा किसी राजीव दीक्छित जी के लेख में लिखा है फिर हम किस बिना पर यह जश्ने आजादी मन रहें जहाँ की सर्कार को भूख ,बीमारी, भय जैसे दुर्भाग्य पूर्ण समस्यायों के प्रति कोई सम्वेदंधीलता नहीं और लाल किले के प्राचीर से अपनी उपलब्धियों को गिनने में हमरे पी एम् जरा भी शर्मिंदगी नहीं महसूस करते तथा शांतिपूर्ण आन्दोलन कारियों को कहते हैं ये लोग देश में अराजकता फैला रहें हैं यह कहाँ तक जायज है . लेकिन यह लडाई लम्बी है और बाबा रामदेव एवं अन्ना हजारे की टीम ने अभी इस आन्दोलन को गाँव गाँव शहर शहर तक ले जाना होगा तब जाके जनता शायद इस गंभीर विषय पर कोई बिकल्प देने की सोंचेगी अभी तो यह संसद और यह लोकतंत्र केवल ५४३ एम् पी लोगों की जायदाद बनी हुयी है जहाँ ये अपने सुविधा अनुसार कानून बनाते हैं और जरुरत पड़ने पर संविधान में संशोधन भी करते हैं .अंत में आपके अछे विचारों के लिए धन्यवाद देता हूँ

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

आदरणीय दुबे साहब                   सादर नमस्कार, आपने कारगिल शहीदों के बारे में लिखा है कि वे बीजेपी के शहीद हैं ऐसा कहना है इस सरकार का. आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि हम बचपन से शहीद भगतसिंह शहीद भगतसिंह कहते चले आ रहे हैं. किन्तु आज तक हमारे राष्ट्रीय रिकॉर्ड में भगतसिंह को शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है. और जान लें भगतसिंह को मरवाने वाले लेखक खुशवंत सिंह के पिता शोभा सिंह के नाम पर दिल्ली में एक चौराहे का नामकरण करना चाहते है पी एम् साहब.                                         दूसरी जों गलतफहमी पूरा देश पाल रहा है हिंदी को मात्रभाषा मानने कि जों कि सरकारी रिकॉर्ड में कहीं भी मात्रभाषा के रूप में दर्ज नहीं है. मै कहता हूँ इस नालायक प्रधानमन्त्री को हिंदी नहीं आती तो गुरुमुखी में ही बोले हमें अच्छा लगेगा क्योंकि वह हमारे देश कि भाषा तो होगी. किन्तु अंग्रेजों के चाटुकार उनकी भाषा को कैसे छोड़ सकते हैं.                                         और लोकतंत्र कि जहां तक बात है वह सिर्फ नाम है. इसी का सहारा लेकर कुछ लोग संसद में कब्जा जमाये बैठे हैं. जिन पर से पूरे देश का विश्वास उठ गया हो वे फिर भी अपने आप को जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि बता रहे हैं. क्योंकि वे जानते हैं कि जनता के पास हमें वापस बुलाने का कोई रास्ता उपलब्ध नहीं है.                

के द्वारा: akraktale akraktale

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. अन्ना नें लोगों में उम्मीद जगाई है. सरकार की और से उदासीनता का परिणाम सरकार को अवश्य भोगना पड़ेगा. अन्ना को एक और राजनितिक दल बनाने से बचना चाहिए. चुनावी राजनीति से बचना चाहिए. प्रस्तावित राजनितिक दल दलों के दल दल में अपनी पहचान कहीं खो न बैठे.अन्ना टीम द्वारा राजनीतिक दल का गठन किया जाना उचित नहीं लगता है. एक तो देश में राजनीति के क्षेत्र में बहुत से विकल्प पहले से मौजूद हैं. अन्ना टीम द्वारा गठित विकल्प किस तरह से बेहतर होगा कहना मुश्किल है. राजनीति एक काजल की कोठरी या कीचड का तालाब है. इसमें प्रवेश करने वाला बेदाग़ बाहर नहीं आ सकता. अन्ना को इस बात पर विचार करना पड़ेगा कि क्या इनके द्वारा गठित राजनीतिक दल मौजूद दलों से अलग होगा. आज देश की जनता भ्रष्टाचार जनित गरीबी, भुखमरी, बीमारी, मंहगाई, गैर बराबरी जैसी व्याधियों से त्राहि त्राहि कर रही है. अन्ना के जन लोकपाल आन्दोलन में एक आशा की किरण दिखाई दी थी. गैर राजनीतिक होने के कारण आन्दोलन की विश्वसनीयता काफी ज्यादा थी. राजनीतिक दल में गठित होने पर आन्दोलन की विश्वसनीयता समाप्त हो जायेगी. अन्य राजनीतिक दलों से सम्बद्ध लोग जो अन्ना के आन्दोलन से जुड़े थे अपने पैत्रिक दल में वापस जाना चाहेंगे. अन्ना दल पर राजनीति में प्रवेश करने के माध्यम होने का दोषारोपण करेंगे.. एक और दल का गठन करने से स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं पड़ेगा. उलटे विपक्ष के मतों के विभाजन से विकल्प और कमज़ोर होगा. यह स्थिति कांग्रेस के अनुकूल आएगी. अन्ना को चाहिए गैर राजनीतिक धरातल पर ही वे अपने आन्दोलन को सशक्त बनाएं. गाँव गाँव जा कर लोगों को शिक्षित करें राजनीति में अपराधियों और भ्रष्ट लोगों के प्रवेश को रोकें. चुनाव सुधारों और न्याय पालिका के लिए वांछित सुधारों को भी आन्दोलन के एजेंडा में शामिल करें. इन सब बातों को लेकर एक विशाल गैर राजनितिक जन आन्दोलन खड़ा किया जाय. गैर राजनीतिक होने से अन्य दलों के और सभी अन्य लोग भी इस और आकर्षित होंगे. आन्दोलन का नाम करण कोई समस्या नहीं है. वर्तमान में प्रयोग में आने वाला India Against Corruption एक अच्छा नाम है.. परिवर्तन अवश्य आएगा .आएगा साभार

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

डाक्टर साहब मेरा प्रयास जारी रहेगा, आपलोगों का समर्थन जो मुझे मिल रहा है. समस्यायों को यूँ झेलते रहने से अच्छा जन जागरण द्वारा सरकार के विरोध में जनता को गोलबंद करना है. और जो मुगलिया सल्तनत बनाने की यह कांग्रेस सोंच रही है वह सपना बनकर रह जायेगा उनका . यह अपने देश का दुर्भाग्य है की इतना कुछ होने पर एक बृहद क्रांति का स्वरूप क्यूँ नहीं ले रहा अन्ना का आन्दोलन और मिडिया तो बिकाऊ है जो उनको पैसा देता है उनके लिए ये कसीदे काढते रहते हैं और जन समस्यायों के लिए कहाँ तो ये मिडिया वाले कोई समाधान का सुझाव देते, वैसे नेताओं का विचार दिखाते जो सचमुच समाजवादी विचार धारा को अपनाने वाले समाजसेवी हैं. अब तो अरविन्द केजरीवाल और उनके साथियों की जान पर बन आई हैं फिर भी सरकार चुप है, शायद उनके साहस की परीक्छा लेना चाहती है मेरा विश्वास है ये लोग इस अग्नि परीक्छा में अपनी जीत दर्ज करेंगे और जनसमर्थन भी दिनोदिन बढेगा और इस बार आर पार की लडाई है या सरकार जनता को न्याय दिलाये दोषियों को सजा दिलाये जेल भेजे और अपनी सरकार को एक साफ सुथरी छबि वाले नेताओं की सरकार साबीत करे वरन गद्दी खाली करे .

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

आपने एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है. एक तो गुआहाटी की घटना हमारे समाज के अधोपतन की चरम पराकाष्ठा को दर्शाती है. मीडिया, मानवाधिकार और अन्य जैसे महिला आयोग इत्यादि जिनकी स्थापना महिला अधिकारों की रक्षा और कल्याण के लिए की गई है, उनके सदस्यों के अपने व्यक्तिगत एजेंडा हैं. कानों व्यवस्था की भी अपने कार्य में रूचि नहीं रह गई है. कानून का डर कानोंन का पालन करने वाले के लिए है. क़ानून तोड़ने वाला निडर है. शासक वर्ग का आम आदमी की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है. आदमी जाय तो कहाँ जाय. स्थिति विष्फोटक होती जा रही है. हम अराजकता के मुहाने पर खड़े हैं. मुझे कोई रास्ता नज़र नहीं आता है. मैं हतोत्साहित हूँ.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

आज सवाल सत्ता परिवर्तन की नहीं आज सवाल है जो सत्ता में काबिज है वह जनता के प्रति कितना संवेदनशील है क्या उसको जनता की फिकर है निस्संदेह आज दूध का धुला कोई नहीं मिलनेवाला पर जवाबदेही जरुर होनी चाहिए सर्कार की जनता के प्रति पुलिस एवं सरकारी अफसर आखिर किसके प्रति जवाबदेह हैं सर्कार के प्रति या जनता के प्रति यह बिलकुल कटु सत्य है भ्रष्टाचार आज रग रग में रच बस गया है और इस देश की जनता इसकी आदि हो चुकी है लेकिन यहाँ घोटाले मुद्दा है आज भ्रष्टाचार मुद्दा नहीं घोटाले मुद्दा है जो अरबो खरबों की हेरा फेरी नेता अफसर मंत्री कर ले रहे हैं जिससे हमारे देश की अर्थ ब्यवस्था प्रभवित हो रही है जनता इससे दुखी है और जिनपर आरोप लगे वे क़ानूनी कार्रवाई से बचे हुए हैं बचाए जा रहे हैं जनता इस बात से त्रस्त है आज जनता सत्ता परिवर्तन के लिए इस कारन से सोंच रही है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

जो कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं राष्ट्रपति चुनाव में क्या आपकी नजर में वे कांग्रेस विरोधी हैं जैसे की जदयू अगर जदयू विरोधी होते जो की आपने लिखा है उनका वजूद हिन् कांग्रेस विरोध पर है तो मेरी नजर में अपना वजूद वे खो रहे हैं कांग्रेस के उम्मेदवार को समर्थन देकर, माना प्रणब मुखर्जी एक अनुभवी और पुराने कांग्रेसी नेता है पर नितीश कुमार जैसे नेता जो कांग्रेस का विरोध कर हिन् वजूद में आये और जिनका अपने राज्य में बीजेपी के समर्थन से सर्कार चल रहा है उनका कांग्रेस के उम्मेदवार का समर्थन करना और बीजेपी के उम्मेदवार का खिलाफत करना कहाँ की राजनीती है यह सरासर अवसरवादिता है और इसका परिणाम आगे चलकर अच्छा नहीं होनेवाला आज मुख्य बिपक्छी दल बीजेपी एक अछूत पार्टी बनकर रह गयी है इसमें निस्संदेह उनकी भी गलती है लेकिन फिर भी एक सव्क्छ लोकतंत्र के लिए एक मजबूत बिपक्छ का भी होना उतना ही जरुरी है वर्ना कांग्रेस की मनमानी तो जग जाहिर है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

आदरणीय दुबे जी नमस्कार, आप या हम सब लाख आलोचना करलें की कांग्रेस में तानाशाही है और प्रणब दा को राहुल के मार्ग से अलग कर दिया है. किन्तु हकीकत को देखें तो मालुम होता है की एक परिवार की सत्ता होने से यह पार्टी आज टूटने की चिंता से मुक्त है सरगना चोर है तो चोरों की नगरी में उसी की जय होगी एक बार नहीं हर बार होगी. और यही हमें २०१४ के चुनाव में भी देखेंगे. भाजपा में कोई नेता नहीं है जो सबको एक सूत्र में बाँध सके,देश में कोई भी राजनैतिक दल बेदाग़ नहीं है. फिर कोई भाजपा का साथ देगा भी क्यों? कांग्रेस की शरण में ही फलने फूलने का अवसर भला कौन गँवाएगा. यही होना है जनता भ्रष्टाचार की एडिक्ट हो चुकी है वह इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं करती कुछ लोग हैं जो इस दलदल में असहज महसूस कर रहे हैं, मगर उन चंद लोगों के बल पर सत्ता पतिवर्तन तो नहीं हो सकता है ना.

के द्वारा: akraktale akraktale

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

के द्वारा: akraktale akraktale

के द्वारा: jlsingh jlsingh

निशाजी सुसंस्कृत भासा बोलनेवालों को संसद में जगह नहीं मिलती अब तो ये नेता यही साबित करने में लगे है की जो जितना ज्यादा अभद्र भासा का प्रयोग करेगा वो उतना ही कद्दावर नेता कहलायेगा इनको जनता और देश के गरीबी से कोई सरोकार नहीं इनको तो चुन के आने के बाद लूटने का लाईसेंस मिल गया है और ये नित नए घोटालो के द्वारा देश की सम्पति गरीब जनता की सम्पति लूट ही रहे हैं और इसी तरह यह वर्तमान कांग्रेस सर्कार अपने पांच साल के कार्यकाल को पूरा कर भी लेगी क्यूंकि आज विपकछ भी संदेह और भ्रष्टाचार से घिरा है इसीलिए उसके मुह में जुबान नहीं की वह पूर जोर विरोध भी कर सके, ले दे के संसद को स्थगित कर जनता का बाकि काम भी ये सांसद करने नहीं देते

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

महोदय मैंने इसी आशा से यह लिखा है कोई गैरसरकारी संसथान भी आगे आये या ब्यापारी ही आगे आयें और और अनाज को सड़ने के बजाय इसका उपयोग करे गरीबों में बांटे ,शराब बनानेवाले तो हर साल ले ही जाते हैं लेकिन अब तो आलम ये है की गेहू की उपलब्धता इतनी ज्यादा है की इसकी खपत करनेवाले भी सोंच नहीं पा रहे इतने गेहू का क्या हो? . और ऐसे में किसानो का मनोबल बहुत गिरता है परभावित होता है . अतः मेरी राय में जो भी बिस्कुट या ब्रेड बनानेवाले हैं इस गेहू को ज्यादा से ज्यादा मात्रा मे ले लेशायद उनके पास भण्डारण की छमता हो और इससे बनाये गए ब्रेड एवं बिस्कुट को गरीबों को सस्ते में मुहैया कराये क्या यह हल नहीं हो सकता सड़ते हुए गेहू के विषय में ?

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

उनमे सबसे बड़ा मसला काला धन एवं अनाज की बर्बादी है लेकिन ये सांसद तो दबी जुबान अन्ना हजारे को कोसते नजर आये और सड़क पर कानून नहीं बनते सांसद में कानून बनते है यही कहते पाए गए यह नहीं बताये की जन्लोक्पल कब बनेगा कब पास होगा और जनता को इंसाफ कब मिलेगा व्हिसल ब्लोवर क्यूँ मारे जा रहे हैं आर टी आई कार्यकर्त्ता क्यूँ मौत के घाट उतारे जा रहे हैं. इनकी चिंता अगर इन्हें होती तो आज लोग खुले आम सांसदों को भला बुरा कहते! पता नहीं कब ये चेतेंगे और कब जनता जागेगी? आपने बहुत ही अच्छा विषय रखा है चर्चा के लिए. एक बात और याद आ रही है " इलाहाबाद में आग लगी और आंध्र प्रदेश में वर्षा हुई, दोनों जगह कुछ लोग मरे और संसद में सिर्फ चर्चा हुई" .....हास्य कलाकार के मुख से .

के द्वारा: jlsingh jlsingh

महोदय यह बात तो सबको पता है की अनाज सड़ने का मसला कोई नया मसला नहीं यह वर्षों पुराना है पर मुझे नहीं लगता की अनाज के सड़ जाने से किसी ब्यापारी का कोई लाभ होता होगा हाँ अगर सर्कार किसी ब्यापारी को मुफ्त में यह गेहूं दे दे और फिर वही गेहूं वह ब्यापारी महंगे दामो में बेंचे यह वह ब्यापारी जरुर चाहता होगा पर खानेवाले लोग ही न रहेगे तो वह इसे बेन्चेगा किसे जो हाल है उसमे लोग भूखों मरने को ही तो बाध्य हैं या आत्महत्या करने को बाध्य हैं मैं समझता हूँ हमारे स्तर पर जो कुछ लिखने के माध्यम से कर सकते हैं किया जाये न मैं नए गोदाम बनवा सकता हूँ न सड़ते गेहूं को न सड़ने देने में कोई सहायता कर सकता हूँ पर मैं इतना सोचता हूँ अगर यह मेरा ब्लाग कोई सम्बंधित अधिकारी या समाजसेवी पढता होगा तो कुछ कदम उठाएगा . आपकी प्रतिक्रिया का धन्यवाद

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

आदरणीय दुबे जी नमस्कार, आप किस सरकार से गुहार कर रहे हैं जिसको सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट कहा गया था की अनाज सड़ाने से बेहतर है की आप इसे गरीबों में मुफ्त ही बंटवा दें किन्तु तब क्या हुआ था आप भी भलीभांति जानते ही हैं फिर अब कैसे इनसे अपेक्षा की जाए. प्रतिवर्ष किसानो को फसल उगाते समय खाद के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है और वाही हाल गेहूं के आने के बाद होता है. क्या आज प्रशासन बताने की स्थिति में है की पिछले वर्ष खराब हुए गेहूं से सबक लेकर सरकार ने कितने नए भण्डार बनाए हैं. शायद नहीं. क्योंकि अब सरकार में कारोबारी बैठे हैं उन्हें अपने कारोबार की चिंता है. देश की नहीं. जब सरकार किसी कार्य को करने में अक्षम रहेगी तभी तो वे अपने कारोबार को फैला सकेंगे. आपकी गुहार पर सरकार ही क्या कोई अन्य जिनसे आपकी गुजारिश है यदि वे भी कुछ कर सके तो मुझे अत्यंत ख़ुशी होगी.

के द्वारा: akraktale akraktale

प्रिय श्री दुबे जी, सादर नमस्कार. मेरी समझ में दिग्विजय सिंह कांग्रेस की हार के एक अकेले कारण नहीं हैं. कारण अनेकों हैं. 2G,CWG, आदर्श सोसाइटी घोटाला, अन्ना के जन लोकपाल विधेयक, बाबा राम देव के प्रति सरकार के दुर्व्यवहार ने साबित कर दिया है की कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचारियों के पक्ष में खड़ी है. उसका चेहरा कीचड में सन चुका है. विश्वसनीयता रसातल में चली गयी है. राहुल बाबा की बरसाती मेढक की तरह रोड शो और झोपड़ियों में जाकर बैठने वाली नौटंकी की राजनीति लोगों को प्रभावित नहीं करती है. कांग्रेस करिश्माई नेतृत्व की राजनीति करती रही है. सल्तनत का करिश्मा धूमिल पड़ चुका है. यहाँ तक कि प्रियंका का करिश्मा भी किसी काम न आया. आज करिश्माई नेतृत्व नाहीं बल्कि जनता के बीच रहकर उसके कंधे से कन्धा मिलाकर काम करने वाले, सडकों की धूल वाले नेतृत्व की आवश्यकता है. कांग्रेस सल्तनत की सामंतवादी परंपरा में विश्वास रखती है.सामंतवादी परंपरा के दिन अब लद चुके हैं. मेरे विचार में यह हैं कांग्रेस की हार के कुछ प्रमुख बिंदु. आपके विचार जानना चाहूंगा. साभार

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

आपने बिलकुल ठीक फ़रमाया अगर कार्य को देखकर पार्टियाँ टिकट देने लगे तो उन्हें आधे उम्मीदवार भी न मिलें , पर क्या जो अब हो रहा है वही होते रहना चाहिए ? शायद आप भी कहेंगे नहीं, तो फिर जो होना चाहिए वह कैसे होगा? इसीका प्रयास जागरण मंच पर लिखने पढने वाले मित्रों को करना चाहिए हो सकता है कुछ लोगों की राजनीतक बिरादरी में भी पैंठ हो आखिर अगर चे राजनीती में आगे आना देश सेवा होती तो ये आये दिन नेताओं का वेतन अनाप सनाप तरीके से न बढाया जाता क्यूंकि राजनीत उनके लिए ही है जो लोग अपना स्वार्थ न देखते हुए देश की जनता के लिए कुछ करने की भावना रखते हो राजीनीत यूँ ब्योपार नहीं कही जानी चाहिए अगर यह ठीक नहीं तो नेता मंत्री देश के सामने बयान दे, इसके पहले की अन्ना हाजारे एवं बाबा रामदेव आन्दोलन और अनशन के लिए बैठें नेताओं को अपना असली चरित्र एवं चेहरा देश वासियों को दिखाना चाहिए क्यूंकि उनकी शान में अगर कुछ कहा जाता है तो ये नेता एकजुट होकर इसका विरोध करते हैं . उन्हें एक आदर्श ब्यक्तित्व का स्वामी बनकर दिखाना चाहिए तभी वे इस लोकतंत्र के सच्चे प्रतिनिधि कहे जा सकते हैं विचार रखने का धन्यवाद

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

निशाजी सबसे पहले मैं आपका धन्यवाद करना चाहूँगा आपने इस अहम् मुद्दे पर अपने विचार रखे , जिस दिन हमारे देश के नेता आम आदमी को क्या चाहिए? ये जान लें उसी दिन से इस देश की रूप रेखा में बदलाव आना शुरू हो जायेगा आज हो क्या रहा है? करोड़ों अरबो रुपये ये नेता यूँ ही पानी की तरह चुनाव कराने और चुनाव जीतने के लिए बर्बाद कर देते हैं फिर भी चुनाव नतीजे उनकी अपेक्छा से अलग ही आते हैं, क्या एक बार ऐसे बिकल्प की तरफ उन्हें नहीं सोचना चाहिए की कम से कम एक साल के लिए अपनी कमाई को छोड़ कुछ जनसेवा की कमाई कर ली जाये, अगर ऐसा आज के मंत्री और नेता सोंच ले जरुर इस देश की तस्वीर बदल जाएगी और किसी अन्ना को खड़ा होकर सडको पर धरना प्रदर्शन भी नहीं करना पड़ेगा आपके विचार से क्या ऐसा दिन आएगा ? क्या यह माहौल बनेगा ? आप जरुर लिखें धन्य्वाद्सहित

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

निशाजी , हम और आप प्रयत्न ही तो कर रहें है अपने लेखन के माध्यम से और मैं तो अन्ना हजारे का अंध समर्थक हूँ २५ तारीख को जंतर मंतर पर भी गया था आखिर बदलाव आएगा कैसे जब तक सर्कार को अन्ना के आन्दोलन में संख्या दिखेगी उन्हें शक्ति का भी अंदाजा होगा और अन्नाजी तो एक निस्स्वार्थ सेवक हैं हाँ उनके साथ जुड़े लोग तो जरुर विवादों में घिरे हैं पर देखना है उनके विवाद सरकारी भ्रष्टाचार की तुलना में कितना है जो सर्कार नित नए घोटालों में फसती नजर आ रही है और मुकाम चाहे वह राष्ट्रिय हो या अंतर्राष्ट्रीय हर मसले पर फेल हो रही है अब तो देश की सुरक्छा के मामले भी गंभीर नहीं यह सर्कार फिर इससे ज्याद क्या देखने को रह गया है , अगर इस देश में एक मजबूत विपकछ होता तो सर्कार यूँ मनमानी नहीं कर पाती

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

भैया जी सरकारें तो आती जाती रहती है और पार्टियाँ भी बनती बिगडती रहती है देश कहीं नहीं जाता ? क्या अन्ना हजारे देश को यह गारंटी दे सकते है की उनके द्वारा प्रस्तावित जन लोक पाल इस देश से भ्रष्टाचार समाप्त कर देगा, भैया जी कमी किसी भी कानून में नहीं है वर्तमान में भी बहुत से कानून हैं और लोकपाल बनाने के बाद भी कानून की इन्ही धाराओं में मुकद्दमे भी चलेंगे केवल केवल एक व्यक्ति या ग्रुप उनको लागू करेगा वह आज भी हो सकता है अगर ईमानदार लोग कानून को लागू करे - और क्या प्रस्तावित लोक पाल स्वर्ग से अवतरित होगा शायद नहीं - इस विषय पर मेरी पोस्ट " राजनितिक गुंडा गर्दी " अवश्य पढ़ें. धन्यवाद. http://sohanpalsingh.jagranjunction.com/2012/03/24/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80/

के द्वारा: s.p. singh s.p. singh

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

क्या इन चुनावों में भ्रष्टाचार सबसे प्रमुख मुद्दे के रूप मे अपना असर छोड़ पायेगा ? मेरे विचार से , इन चुनावों में भ्रष्टाचार हीं प्रमुख मुद्दा रहेगा क्यूंकि आज जनता हर जगह इससे त्रस्त है खासकर इस देश की गरीब जनता , जिनको सरकारी योजनाओं से कोई लाभ मिलना हो, या अपना बीपीएल कार्ड बनवाना हो या रोजमर्रा की जरुरत का सामान सरकारी वितरण प्रणाली के तहत मुहैया होनेवाले सामान जैसे चीनी , मिटटी का तेल इत्यादि कोई भी सामान लेना हो .उन्हें समय से नहीं मिलता अगर मिलता है तो पूरा नहीं मिलता और जो कोटेदार है वह आधा से ज्यादा सामान या तो लेता हीं नहीं या उसे मिलता ही नहीं ,जो मिलता है उसका पचास फीसदी वह बेंच देता है और कुछ हीं लोग इन दुकानों से सामान ले पते हैं और वे अक्सर दबंग या रसुकवाले होते हैं गरीबों को जिन्हें इसकी जरुरत है उन्हें मुश्कील हीं कुछ मिलता है भ्रष्टाचार का इससे ज्वलंत उदहारण और क्या हो सकता है अतः जो भी वर्तमान सरकार जिस किसी भी राज्य में है सबके खिलाफ हीं जनता का मत जाने के आसार हैं और अन्ना के आन्दोलन में देश के कई हिस्से से लोग आये थे और जो नहीं आ सके वे सभी टेलीविजन पर देखकर उस आन्दोलन से जुड़े , आज भले नेतालोग उनके खिलाफ प्रचार कर रहें हैं लेकिन उनका निस्स्वार्थ एवं त्याग भरा जीवन और उनका देश्ब्यापी आह्वान जो की भ्रस्ताचार और जन्लोक्पल बिल के बारे में था , सबको यह सन्देश देता है की भ्रष्टाचार को अब मत सहो और जो भ्रष्ट हैं उनको दुबारा न चुनो . जिनको जनसेवक होना था वे मालिक बनकर जनता पर घोर अत्याचार कर रहें हैं और इतना कुछ होने पर भी भ्रस्ताचार की कोई बात नहीं कर रहें केवल मतदाताओं को जाती एवं धर्म का वास्ता देकर प्रलोभन दे रहें हैं झूठे वादे कर रहें हैं जिन वादों को उन्होंने कभी पूरा नहीं करना है कोई नेता कभी यह कहता सुना गया की अगर वह चुनाव के दौरान किये जा रहे वैदे नहीं पूरा करेगा तो अपन पद छोड़ देगा अतः अब जनता ने हीं इन नेताओं को सबक सिखाना है और आनेवाले चुनाव के परिणाम बतायेगे की इन चुनावों में भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दा बनकर अपना असर दिखा पाया या नहीं ?

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey




latest from jagran